जोहार लाइव ब्यूरो
सुरक्षित और संरक्षित बंगाल, “भरोसा इन, भय आउट” जैसे नारों के दम पर पहली बार सत्ता में आई बीजेपी को अपने ही नारे चिढ़ाने लगे हैं. राज्य में क्राइम के ग्राफ में कोई खास तब्दिली नहीं आ रही है. एक आरटीआई के माध्यम से हुए खुलासे में यह जानकारी निकल कर आई है कि बीते पांच महीने में राज्य में बलात्कार के 2400 मामले दर्ज किए गए हैं.
टीएमसी नेता साकेत गोखले ने पश्चिम बंगाल पुलिस के स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो से बीते मई माह से सितंबर महीने के आखिरी तक के आंकड़े आरटीआई से माध्यम से मांगे थे. बता दें, पश्चिम बंगाल के वर्तमान सीएम शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई 2026 को पहली बार राज्य की कमान संभाली थी.
आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक बंगाल में सिर्फ 5 महीनों में 2,400 से ज्यादा रेप के मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं हत्या के 600, हत्या के प्रयास से 13,114 और गंभीर रूप से चोट पहुंचाने के कुल 32,341 मामले दर्ज किए गए हैं.
पूरे मामले पर टीएमसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भाजपा के शासन में बंगाल ऐसा राज्य बनता जा रहा है, जहां महिलाएं और आम नागरिक लगातार डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं. पार्टी ने सवाल उठाया है कि क्या यही वह “सुरक्षित और संरक्षित बंगाल” है, जिसका वादा भाजपा ने किया था? क्या “भरोसा इन, भय आउट” से उनका यही मतलब था?
क्योंकि जमीन पर सामने आ रही तस्वीर इससे बिल्कुल अलग कहानी बयां करती है. ऐसा बंगाल, जहां अपराध बढ़ रहा हो, अपराधियों के हौसले बुलंद हों और महिलाओं को अपनी सुरक्षा की चिंता लगातार सताती हो, उसे सामान्य स्थिति के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता.
सीएम सुवेंदू अधिकारी पर निशाना साधते हुए टीएमसी ने कहा, बंगाल की जनता को सुरक्षा, जवाबदेही और न्याय चाहिए, सिर्फ जुमले नहीं. सुवेंदु अधिकारी, नारों और खोखले वादों के पीछे लगातार नहीं छिप सकते. आप बंगाल की जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं. हम पहले दिन से यह बात कहते आ रहे हैं और हर गुजरते दिन के साथ आपके कथित नाकामियों को छिपाना मुश्किल होता जा रहा है.
बंगाल सहित देशभर के आंकड़े भयावह
बीते 3 दिसंबर 2025 को राज्यसभा सांसद परिमल नाथवाणी ने महिलाओं के खिलाफ होनेवाली हिंसा पर राज्यसभा में सवाल (https://www.mha.gov.in/MHA1/Par2017/pdfs/par2025-pdfs/RS03122025/390.pdf) उठाया था. मिले जवाब के मुताबिक साल 2021 से 23 के दौरान पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 1,05,313 मामले दर्ज किए गए थे. वहीं इसी अवधि में देशभर में 13,21,745 मामले दर्ज हुए थे.
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