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    Home»जोहार ब्रेकिंग»25 साल की सत्ता यात्रा पर PM मोदी बोले- ‘मैं एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीने वाला इंसान हूं’, कहा- जिसने गिराया उसी ने खड़ा होना सिखाया
    जोहार ब्रेकिंग

    25 साल की सत्ता यात्रा पर PM मोदी बोले- ‘मैं एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीने वाला इंसान हूं’, कहा- जिसने गिराया उसी ने खड़ा होना सिखाया

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyOctober 7, 2026No Comments6 Mins Read5
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    Narendra Modi
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    जोहार लाइव ब्यूरो

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर अपने सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक सफर, चुनौतियों, आलोचनाओं और देश की विकास यात्रा का जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा कि 7 अक्टूबर 2001 को जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन इस मुकाम तक पहुंचेंगे.

    मोदी ने कहा कि बतौर हेड ऑफ द गवर्नमेंट सेवा करते हुए उनके 25 साल पूरे हुए हैं. उन्होंने इसे जनता के निरंतर आशीर्वाद का परिणाम बताया और भाजपा, एनडीए तथा लोकतंत्र में आस्था रखने वाले लोगों का आभार जताया.

    ‘मैं एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीता हूं’

    अपने 25 साल के सफर को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि जीवन में क्या बनना है. उनका लक्ष्य पद हासिल करना नहीं, बल्कि देश के लिए काम करना रहा.

    उन्होंने कहा, “मैं एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीने वाला इंसान हूं.” मोदी ने बताया कि संगठन के लिए काम करना उनके राजनीतिक जीवन का हिस्सा रहा. उन्होंने कहा कि अगर चुनावी राजनीति में चमकने की इच्छा होती तो वह बहुत पहले ही चुनावी मैदान में उतर सकते थे, लेकिन यह उनका मिजाज नहीं था.

    ‘जिसने गिराया, उसी ने खड़ा होना सिखाया’

    पीएम मोदी ने अपने भाषण में विरोध और असफलताओं को भी सीख का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि जीवन की हर घटना ने उन्हें कुछ न कुछ सिखाया है. उन्होंने कहा,

    “जिसने मुझे गिराया, उसने मुझे खड़ा होना सिखाया. जिसने मेरा विरोध किया, उसने मुझे लोकतंत्र की शक्ति समझाई.”

    मोदी ने कहा कि उन्होंने ईश्वर से हमेशा यही मांगा कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म न हो. उनके मुताबिक हर संकट उनके धैर्य की परीक्षा रहा, जबकि हर सफलता ने उन्हें बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ने का सामर्थ्य दिया.

    प्रधानमंत्री ने अपने बचपन की यादों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वडनगर के स्कूल के दिनों से ही उनमें सीखने की ललक रही. क्लास में सबसे पहले पहुंचने वाले छात्रों में उनका नाम होता था. मोदी ने कहा कि सीखने की यह आदत आज भी उनके जीवन का हिस्सा है और वह खुद को आज भी विद्यार्थी मानते हैं.

    चंद्रयान से कोरोना तक, हर अनुभव से मिली सीख

    पीएम मोदी ने कहा कि उनके 25 साल के सफर में कई ऐसी घटनाएं आईं, जिन्होंने उन्हें अलग-अलग सबक सिखाए.
    उन्होंने कहा,

    “चंद्रयान ने मुझे असफलता से उठना सिखाया. कोरोना ने सामूहिक चेतना सिखाई.”

    उन्होंने मीडिया के खट्टे-मीठे अनुभवों का भी जिक्र किया. मोदी ने कहा कि गांव, गरीब और आम लोगों से उन्हें यह सीख मिली कि साधन और संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन सपने बड़े और हौसले बुलंद होने चाहिए.

    प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके 25 साल के राजनीतिक सफर का मूल्यांकन सिर्फ इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि वह खुद कहां पहुंचे. उन्होंने कहा,

    “25 सालों का आकलन इससे नहीं होगा कि मैं कहां पहुंचा, बल्कि इससे होगा कि मेरा देश कहां पहुंचा.”

    मोदी ने कहा कि भारत में जन्म लेना ही उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य है. उन्होंने कहा कि सत्ता और पद-प्रतिष्ठा की तुलना भारत की सेवा के अवसर से नहीं की जा सकती.

    ‘2014 में देश निराशा में डूबा था’

    अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल की शुरुआत का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि 2014 में देश के सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं और लोगों को नए रास्ते की तलाश थी. उन्होंने कहा कि उस समय भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर दुनिया में निराशा का माहौल था. ऐसे समय में देश को उम्मीद की जरूरत थी.

    मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने अनुभव को भी याद किया. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था की ज्यादा जानकारी न होने के बावजूद उन्हें जनता की शक्ति पर भरोसा था. इसी भरोसे को उन्होंने अपना सामर्थ्य बनाया और जनता को साथ लेकर फैसले लिए.

    नरेंद्र मोदी की 7 शपथ, गुजरात के CM से लगातार तीसरी बार PM तक

    • पहली शपथ (गुजरात के मुख्यमंत्री) : 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.

    नरेन्द्र मोदी जी ने आज के ही दिन 7 अक्टूबर 2001 के दिन पहली बार गुजरात के  CM की शपथ ली थी.

    • दूसरी शपथ (गुजरात के मुख्यमंत्री) : दिसंबर 2002 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद उन्होंने दूसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

    जब दूसरी बार गुजरात के CM बने थे नरेंद्र मोदी,

    • तीसरी शपथ (गुजरात के मुख्यमंत्री) : दिसंबर 2007 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मोदी ने तीसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.

    जब पहली बार गुजरात के CM बने थे नरेंद्र मोदी, मां हीराबेन ने मांगी थी सिर्फ  ये 2 चीजें - India TV Hindi

     

    • चौथी शपथ (गुजरात के मुख्यमंत्री) : 26 दिसंबर 2012 को विधानसभा चुनाव में जीत के बाद उन्होंने चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

    Narendra Modi takes oath as Chief Minister of Gujarat - The  HinduBusinessLine

    • पांचवीं शपथ (भारत के प्रधानमंत्री) : 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में देश के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार शपथ ली.

    नरेन्द्र मोदी का शपथ ग्रहण समारोह - विकिपीडिया

    • छठी शपथ (भारत के प्रधानमंत्री) : 30 मई 2019 को लोकसभा चुनाव में जीत के बाद उन्होंने लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.

    • सातवीं शपथ (भारत के प्रधानमंत्री) : 9 जून 2024 को नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली.

    ‘वी विल डू इट’ का दिया मंत्र

    कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कई बार “वी विल डू इट” का नारा दोहराया. उन्होंने विकसित भारत, तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत, ओलिंपिक की मेजबानी और अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे बढ़ने जैसे लक्ष्यों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि देश में अगर ऊर्जा और आत्मविश्वास इसी तरह बना रहा तो बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं.

    पीएम मोदी ने पिछले वर्षों में भारत में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि आज मेड इन इंडिया मोबाइल फोन दुनिया में अपनी पहचान बना रहे हैं. जहां कभी देश में बिजली कटौती सुर्खियां बनती थी, वहीं अब सोलर पावर की चर्चा होती है. खेती का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि आजादी के बाद किसी दशक में कृषि वृद्धि दर 2015-25 के दशक में सबसे ज्यादा रही.

    प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके जीवन का एक ही ध्येय रहा है, देश के लिए निस्वार्थ कर्म. उन्होंने कहा, “मेरे लिए कर्म ही सबकुछ है. कर्म ही मेरा धर्म है.” गीता के कर्मयोग का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि वह हर काम पूरी क्षमता के साथ करने को अपना धर्म मानते हैं.

    ‘देश ही मेरे लिए सबकुछ है’

    अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने जनता के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि देशवासियों का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति रहा है. मोदी ने कहा, “मेरे लिए जनता जनार्दन भी ईश्वर का ही स्वरूप है.” उन्होंने कहा कि देश ने उन्हें बहुत कुछ दिया है और इसलिए देश ही उनके लिए सबकुछ है.

    25 साल की इस यात्रा को उन्होंने उपलब्धियों की सूची के बजाय जनविश्वास, सीख और सेवा की यात्रा बताया. उनके मुताबिक यह पड़ाव पीछे मुड़कर देखने का नहीं, बल्कि आने वाले लक्ष्यों के लिए नए संकल्प के साथ आगे बढ़ने का अवसर है.

    Also Read : झारखंड : जमीन घोटाला मामले में एसीबी की बड़ी कार्रवाई, तीन भूमि विक्रेता गिरफ्तार

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