राज्यसभा की विभाग-संबंधी स्थायी समितियों के 2026-27 के पुनर्गठन में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक भी समिति की अध्यक्षता नहीं मिलने पर पार्टी ने सवाल उठाए हैं. टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने इसे संसद को ‘वन पर्सन, वन पार्टी शो’ में बदलने की दिशा में एक और संकेत बताया. वहीं, राज्यसभा में टीएमसी के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखकर कहा कि संसद को ‘डीप, डार्क चैंबर’ में बदला जा रहा है.
बीते, 3 अक्टूबर को जारी संसदीय बुलेटिन के अनुसार 2026-27 के लिए विभाग-संबंधी संसदीय स्थायी समितियों का पुनर्गठन किया गया है.
ओ’ब्रायन ने अपने पत्र में कहा कि राज्यसभा के अधिकार क्षेत्र में आने वाली आठ संसदीय स्थायी समितियों में से किसी एक की भी अध्यक्षता TMC को नहीं दी गई है.
उन्होंने कहा कि राज्यसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी और AITC तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है. इसके बावजूद टीएमसी से समिति की अध्यक्षता वापस ले ली गई. ओ’ब्रायन के मुताबिक, पार्टी के पास 2024-25 और 2025-26 में समिति की अध्यक्षता थी.
2019 की स्थिति का भी दिया हवाला
ओ’ब्रायन ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब टीएमसी को इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा है. उन्होंने 2019 का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी टीएमसी राज्यसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन उसे किसी समिति की अध्यक्षता नहीं दी गई थी. उनके अनुसार, कुछ वर्षों बाद इस स्थिति को ठीक किया गया था, लेकिन अब फिर वही स्थिति लौट आई है. उन्होंने कहा कि समिति अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया के अलावा संसद की कार्यप्रणाली को लेकर भी कई सवाल हैं.
विधेयकों की समिति जांच से लेकर डिप्टी स्पीकर तक उठाए सवाल
ओ’ब्रायन ने पत्र में कहा कि 2004-09 के बीच हर 10 में से छह विधेयक संसदीय समितियों के पास जांच के लिए भेजे गए थे, जबकि 2019-24 के दौरान यह संख्या घटकर हर 10 में दो रह गई. उन्होंने ऑर्डिनेंस से जुड़े विधेयकों का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार, अब पारित होने वाले हर 10 विधेयकों में चार ऑर्डिनेंस से जुड़े होते हैं, जबकि करीब 20 साल पहले यह अनुपात दो था.

संसद के कामकाज के दिनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहली लोकसभा में प्रति सत्र औसतन 45 दिन बैठक हुई थी. दूसरी और तीसरी लोकसभा में यह औसत 36 दिन रहा, जबकि 17वीं लोकसभा (2019-24) में यह घटकर 18 दिन रह गया.
ओ’ब्रायन ने लोकसभा के डिप्टी स्पीकर का पद 2019 से खाली रहने का मुद्दा भी उठाया. इन उदाहरणों का हवाला देते हुए ओ’ब्रायन ने अपने पत्र में कहा कि संसद को ‘डीप, डार्क चैंबर’ में बदला जा रहा है.
सागरिका घोष ने क्या कहा
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ये इस बात के और संकेत हैं कि भारत की संसद को ‘वन पर्सन, वन पार्टी शो’ में बदला जा रहा है. उन्होंने कहा कि डॉ. बीआर आंबेडकर इससे ‘हैरान’ होते. घोष ने राज्यसभा सभापति से इस मामले में हस्तक्षेप करने की उम्मीद जताई.
बता दें, संसद की विभाग-संबंधी स्थायी समितियों ने नए सिरे से हुए गठन में 3 अक्टूबर को तृणमुल कांग्रेस के दो अहम संसदीय समिति उनके हाथ से चली गई. जिसमें वाणिज्य संबंधी स्थायी समिति सुधांशु त्रिवेदी को रसायन एवं उर्वरक संबंधी समिति की अध्यक्षता टीएमसी के बागी गुट के काकोली घोष दस्तीदार को मिली.
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