रांची: एशियन गेम्स में 44 साल बाद भारतीय महिला हॉकी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने वाली झारखंड की चार खिलाड़ियों का रविवार को रांची पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया. कप्तान सलिमा टेटे के साथ निक्की प्रधान, ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेंग का एयरपोर्ट पर प्रशंसकों और खेलप्रेमियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया.
आइची-नागोया 2026 एशियन गेम्स के फाइनल में भारत ने मौजूदा चैंपियन चीन को 1-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता. इस जीत के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम ने 44 साल का स्वर्ण पदक का इंतजार खत्म किया और लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफाई किया.
पूरे टीम के प्रयास से मिली जीत
भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलिमा टेटे ने कहा, “टीम को पता था कि फाइनल में चीन सबसे बड़ी चुनौती होगा, क्योंकि वह शीर्ष टीमों में शामिल है. लेकिन पूरी टीम को खुद पर भरोसा था.”
उन्होंने कहा कि मैच से पहले वह खिलाड़ियों से हमेशा खुलकर खेलने के लिए कहती थीं. भारत ने गोल करने के बाद अपनी बढ़त को बनाए रखने पर ध्यान दिया. चीन जैसी मजबूत टीम के खिलाफ 45 मिनट तक डिफेंस करना बड़ी उपलब्धि थी.
सलिमा ने कहा कि टीम ने जो रणनीति बनाई थी, उसे मैदान पर पूरी तरह लागू किया. इसलिए इस जीत का श्रेय किसी एक खिलाड़ी को नहीं, बल्कि पूरी भारतीय टीम को जाता है.
गोल्ड मेडल की कमी थी
निक्की प्रधान ने कहा, “जब भी झारखंड की खिलाड़ी पदक लेकर लौटती हैं, परिवार, दोस्तों और राज्य के लोग इसी तरह उनका स्वागत करते हैं. उन्होंने कहा कि वापस आकर ऐसा स्वागत मिलना बेहद खास महसूस होता है.”

निक्की के मुताबिक, टीम पिछले छह-सात महीनों से इस टूर्नामेंट के लिए कड़ी तैयारी कर रही थी. टीम ने पिछली प्रतियोगिताओं में हुई गलतियों पर काम किया और अपनी एकजुटता मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया.
उन्होंने कहा कि उनके पास पहले से पदक थे, लेकिन स्वर्ण पदक की कमी थी. टीम का लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि स्वर्ण जीतकर सीधे ओलंपिक क्वालिफिकेशन हासिल करना था.
44 साल बाद जीत का एहसास अलग
दीपिका सोरेंग ने कहा, “44 साल बाद स्वर्ण पदक जीतना बेहद खास है. टीम ने इसके लिए काफी मेहनत की थी और इसी मेहनत का नतीजा है कि भारत ने स्वर्ण पदक के साथ लॉस एंजिल्स ओलंपिक का टिकट हासिल किया.” उन्होंने कहा कि रांची में प्रशंसकों की ओर से मिल रहा स्वागत इस खुशी को और बढ़ा रहा है.
ब्यूटी डुंगडुंग का पहला एशियन खेल, सीधे इतिहास का हिस्सा बनीं
ब्यूटी डुंगडुंग के लिए यह उनका पहला एशियाई खेल था. उन्होंने कहा कि अपने पहले ही एशियाई खेल में देश के लिए इतिहास बनाने का मौका मिलना उनके लिए बेहद खास है. ब्यूटी ने बताया कि टीम ने प्रतियोगिता से काफी पहले तैयारी शुरू कर दी थी. फाइनल में भी टीम तय रणनीति के साथ उतरी, योजना को मैदान पर लागू किया और आखिरकार स्वर्ण पदक जीतने में सफल रही.
झारखंड की इन चार खिलाड़ियों की उपलब्धि ने राज्य के हॉकी प्रेमियों के बीच भी नई उम्मीद पैदा की है. कप्तान सलिमा टेटे, अनुभवी निक्की प्रधान, ब्यूटी डुंगडुंग और दीपिका सोरेंग अब भारतीय महिला हॉकी के उस ऐतिहासिक स्वर्ण अभियान का हिस्सा हैं, जिसने 44 साल बाद एशियन गेम्स में देश को शीर्ष स्थान दिलाया.
Also Read : गेम जीता अब होगी तोहफो की बरसात, झारखंड की चार बेटियों को मिलेंगे 40-40 लाख

