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    Home»झारखंड»अब बेकार नहीं जाएगा टाटा स्टील का स्लैग, बनेगी सड़क ईंट और पेवर
    झारखंड

    अब बेकार नहीं जाएगा टाटा स्टील का स्लैग, बनेगी सड़क ईंट और पेवर

    Team JoharBy Team JoharApril 10, 2026Updated:April 10, 2026No Comments3 Mins Read2
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    टाटा स्टील
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    Jamshedpur : अब टाटा स्टील से निकलने वाला ब्लास्ट फर्नेस स्लैग बेकार नहीं जाएगा, बल्कि इसका इस्तेमाल निर्माण कार्य में होगा। कंपनी की अनुषंगी इकाई आईबीएमडी इस दिशा में तेजी से काम कर रही है। अब यही स्लैग रेत का विकल्प बनकर इस्तेमाल होगा, जिससे निर्माण क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    मानगो फ्लाईओवर में हो रहा इस्तेमाल

    इस पहल की शुरुआत जमीनी स्तर पर भी हो चुकी है। मानगो में बन रहे फ्लाईओवर में हर महीने करीब 2000 टन स्लैग आधारित एग्रिगेट की सप्लाई की जा रही है। आईबीएमडी के एक्जीक्यूटिव इंचार्ज दीपांकर दासगुप्ता ने बताया कि कंपनी अब वेस्ट को उपयोगी उत्पाद में बदलने पर फोकस कर रही है।

    पर्यावरण और लागत दोनों में फायदा

    टाटा स्टील के मुताबिक, एक टन स्टील बनाने पर काफी मात्रा में स्लैग और कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है। ऐसे में इन उप-उत्पादों का इस्तेमाल जरूरी है। स्लैग से बनी सामग्री के उपयोग से निर्माण लागत में करीब 15 प्रतिशत तक कमी आएगी। साथ ही इससे कार्बन उत्सर्जन भी घटेगा, जो पर्यावरण के लिए अच्छा है।

    ईंट, पेवर ब्लॉक और गिट्टी का विकल्प तैयार

    कंपनी स्लैग से सड़क निर्माण के लिए एग्रिगेट, फ्लाई ऐश ईंट, पेवर ब्लॉक और अन्य निर्माण सामग्री बना रही है। ये उत्पाद पारंपरिक ईंट और गिट्टी का विकल्प बन रहे हैं। आने वाले समय में भवन निर्माण के लिए जरूरी लगभग सभी उत्पाद तैयार करने की योजना है।

    सीमेंट कंपनियों को भी हो रही सप्लाई

    टाटा स्टील हर साल एसीसी, डालमिया, न्युवोको जैसी बड़ी सीमेंट कंपनियों को करीब 8 मिलियन टन स्लैग की सप्लाई कर रही है। वहीं कंपनी के अलग-अलग प्लांट से निकलने वाले करीब 18 मिलियन टन स्लैग का उपयोग बाय-प्रोडक्ट के रूप में किया जा रहा है।

    ISI सर्टिफिकेशन के बाद बाजार में एंट्री

    कंपनी इन उत्पादों को बाजार में उतारने से पहले आईएसआई सर्टिफिकेशन का इंतजार कर रही है। इसके लिए लंबे समय से रिसर्च और डेवलपमेंट पर काम चल रहा है। साथ ही कंपनी अपने प्रोडक्ट का पेटेंट भी करा रही है।

    खड़गपुर में नया प्लांट, रेलवे से भी बातचीत

    भविष्य की योजना के तहत खड़गपुर में नया प्लांट लगाया जाएगा, जहां से जीजीबीएस तैयार कर पूर्वोत्तर राज्यों तक भेजा जाएगा। इसका इस्तेमाल सीमेंट और कंक्रीट को मजबूत बनाने में होगा। वहीं रेलवे में नई लाइन बिछाने के लिए भी इस सामग्री के उपयोग को लेकर बातचीत चल रही है।

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