रांची: झारखंड में 302 बालू घाटों की नीलामी के बावजूद बाजार में वैध बालू की किल्लत बनी हुई है. राज्य के 444 घाटों में से 302 की नीलामी हो चुकी है, लेकिन फिलहाल सिर्फ छह जिलों के 14 घाटों से ही कानूनी रूप से बालू का उठाव हो रहा है. बाकी घाट जरूरी मंजूरियों के इंतजार में हैं.
बिजनेस झारखंड के रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने जून 2026 में लंबे अंतराल के बाद 302 घाटों की नीलामी की थी. लेकिन नीलामी के बाद की अनिवार्य प्रक्रियाएं पूरी नहीं होने के कारण ज्यादातर घाट अब तक शुरू नहीं हो सके हैं. आने वाले 15 अक्टूबर को एनजीटी की रोक की अवधि खत्म होने के बाद प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है.
नीलामी के लिए पहले 20-20 घाटों के समूह बनाए गए थे. बाद में समूह का आकार घटाकर 10 घाट किया गया, ताकि छोटे बोलीदाता भी इसमें शामिल हो सकें. हालांकि नीलामी जीतने के बाद भी घाट संचालक तत्काल बालू का उठाव शुरू नहीं कर सकते.
इसके लिए पर्यावरण स्वीकृति, वन विभाग की एनओसी, अंचल अधिकारी की रिपोर्ट, अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा की अनुमति और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) समेत जरूरी मंजूरियां लेनी होती हैं.
छह जिलों के घाटों से ही वैध बालू
फिलहाल दुमका, हजारीबाग, रांची, गोड्डा, पूर्वी सिंहभूम और रामगढ़ के चुनिंदा घाटों से वैध बालू का उठाव हो रहा है. दुमका में छोटाकामटी, हरिपुर और कटोनाई; हजारीबाग में सांर्थ और सोनपुर, लंगतु, सिकरी और पंडरिया; रांची में श्यामनगर; गोड्डा में जसमाता, झिलुवा और सनातन; पूर्वी सिंहभूम में कोरेया मोहनपाल तथा रामगढ़ में सिरका, तोकिसूद और पैंकी घाट शामिल हैं.
घाटों की सीमित संख्या के कारण वैध बालू की सप्लाई मांग के मुकाबले कम है. बाकी घाटों के चालू होने के बाद ही बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है.
3,500 करोड़ का लक्ष्य, लेकिन घाट चालू होना जरूरी
राज्य सरकार ने बालू से सालाना 3,500 करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है. झारखंड में बालू खनन साल के आठ महीने ही होता है और जुलाई से अक्टूबर तक खनन पर रोक रहती है. ऐसे में अक्टूबर के बाद बची अवधि में अधिक से अधिक घाटों को चालू करना सरकार के लिए चुनौती है.
खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल नीलाम घाटों की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं. खान निदेशालय भी लंबित मंजूरियों और प्रक्रियाओं को पूरा कराने में जुटा है.
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