पुराने हो रहे औद्योगिक ढांचे पर चिंता
NML के निदेशक डॉ संदीप घोष चौधरी ने बताया कि देश के पेट्रोकेमिकल, ताप विद्युत और खनन क्षेत्र का करीब 60 से 70 प्रतिशत ढांचा अपनी तय उम्र से ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में हादसों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि ‘Remaining Life Assessment’ यानी RLA तकनीक से इन मशीनों की स्थिति का सही आकलन कर उन्हें सुरक्षित तरीके से और लंबे समय तक चलाया जा सकता है।
रक्षा क्षेत्र में भी RLA की अहम भूमिका
सेमिनार के मुख्य अतिथि डॉ जी सतीश रेड्डी ने कहा कि अब RLA सिर्फ औद्योगिक जरूरत नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला बन गया है। उन्होंने बताया कि मिसाइल, लड़ाकू विमान और अन्य वायुयान प्रणालियों में सुरक्षा बनाए रखते हुए उनकी उम्र बढ़ाना बहुत जरूरी है। इसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना समय की मांग है।
AI के इस्तेमाल पर दिया जोर
डॉ रेड्डी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के जरिए RLA प्रक्रिया को और ज्यादा सटीक बनाया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस तकनीक का दायरा सिर्फ मशीनों तक सीमित न रहे, बल्कि इलेक्ट्रिकल सिस्टम तक भी बढ़ाया जाए, ताकि पूरे सिस्टम की बेहतर निगरानी हो सके।
बड़ी कंपनियों और संस्थानों की भागीदारी
इस सेमिनार में देश की कई बड़ी कंपनियों और संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें टाटा स्टील, ओएनजीसी, बीपीसीएल, आईओसीएल, एनटीपीसी, आईआईटी खड़गपुर, महिंद्रा डिफेंस समेत कई संस्थान शामिल रहे। सभी ने अपने अनुभव साझा किए और सुरक्षा को लेकर नए सुझाव दिए।
NML के योगदान की सराहना
वैज्ञानिकों ने NML के काम की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्थान ने ऊर्जा, तेल-गैस और अंतरिक्ष क्षेत्र में मशीनों की मजबूती और सुरक्षा के आकलन में अहम योगदान दिया है। ऐसे आयोजनों से देश के औद्योगिक और रक्षा ढांचे को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
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