किसलय शानू: रांची
खूंटी में पुलिसकर्मियों के वेतन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता की सीआइडी की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. सीआइडी की जांच में स्पष्ट हुआ है कि एसआइआरबी-02, खूंटी में बतौर अकाउंटेंट तैनात रहे अजीत कुमार ने पांच कांस्टेबलों की रोकी गई सैलरी को दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर कराया. सीआइडी की जांच में आये तथ्यों के अनुसार अजीत कुमार वर्ष 2019-20 से 2021-22 के दौरान SIRB-02, खूंटी में अकाउंटेंट के पद पर तैनात थे.
इसी दौरान दिसंबर 2019 से अगस्त 2021 के बीच तैयार किए गए वेतन बिलों में कथित गड़बड़ी की गई.जांच एजेंसी के अनुसार, पांच कांस्टेबलों की सैलरी उनकी लंबी छुट्टी और उससे जुड़े कारणों की वजह से रोक दी गई थी. वेतन बिल तैयार करते समय इन पांचों जवानों के नाम और उनकी वेतन राशि को सिस्टम में शामिल किया गया, लेकिन राशि उनके खातों में जाने के बजाय एक दूसरे बैंक खाते में डायवर्ट कर दी गई.
जिस खाते में गई रकम, वह रिश्तेदार का
जांच में सबसे अहम कड़ी उस बैंक खाते को माना जा रहा है, जिसमें कथित तौर पर वेतन की राशि भेजी गई. केस डायरी के मुताबिक यह खाता शुभम कुमार के नाम पर है, जो आरोपी अजीत कुमार का चचेरा भाई बताया गया है. शुभम कुमार ने अपने कथित स्वीकारोक्ति बयान में मामले में अपनी भूमिका स्वीकार की है. साथ ही उसने अजीत कुमार को इस पूरे कथित षड्यंत्र का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड बताया है.
सीआइडी की जांच में अजीत की भूमिका पर फोकस
केस डायरी और अनुसंधान पदाधिकारी की रिपोर्ट में अजीत कुमार के खिलाफ प्रत्यक्ष और गंभीर आपत्तिजनक सामग्री सामने आई है. जांच एजेंसी का फोकस यह पता लगाने पर है कि वेतन बिल किस प्रक्रिया से तैयार हुए, पांच जवानों की राशि किस आधार पर दूसरे खाते में गई और इस कथित लेन-देन से जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही. जानकारी के अनुसार केस दर्ज होने के बाद से अजीत कुमार फरार हैं और गिरफ्तारी से बच रहे हैं. जांच के दौरान उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य होने का दावा सीआइडी ने किया है.
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