पाली भाषा के अध्ययन, शोध और संरक्षण को अब संस्थागत रूप से बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. शिक्षा मंत्रालय ने ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय, कोरापुट में क्लासिकल पाली स्टडीज के लिए सेंटर ऑफ एक्सलेंस स्थापित करने को मंजूरी दी है. मंत्रालय ने 1 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन में पांच शास्त्रीय भाषाओं के लिए पांच सेंटर्स ऑफ एक्सलेंस की स्थापना और उनके स्थान तय किए हैं.
इन केंद्रों का उद्देश्य संबंधित शास्त्रीय भाषाओं में अकादमिक शोध, डिजिटलीकरण, संरक्षण और उनकी विरासत के प्रसार को मजबूत करना है. पाली के लिए चुना गया संस्थान ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय है.
पाली को 2024 में मिला था शास्त्रीय भाषा का दर्जा
पाली को केंद्र सरकार ने 3 अक्टूबर 2024 को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया था. इसी फैसले में मराठी, प्राकृत, असमिया और बंगाली को भी यह दर्जा दिया गया था. इसके साथ भारत में शास्त्रीय भाषाओं की संख्या बढ़कर 11 हो गई थी.
सरकार के निर्धारित मानदंडों में भाषा के शुरुआती ग्रंथों या दर्ज इतिहास की 1,500 से 2,000 वर्ष या उससे अधिक की प्राचीनता, प्राचीन साहित्य की विरासत और ज्ञानपरक ग्रंथों के साथ अभिलेखीय साक्ष्य शामिल हैं. साल 2024 में लिंगविस्टिक एक्सपर्ट कमिटी ने पाली को इन संशोधित मानदंडों को पूरा करने वाली भाषाओं में शामिल किया था.
बौद्ध साहित्य की प्रमुख भाषा रही है पाली
पाली का सबसे महत्वपूर्ण संबंध बौद्ध साहित्य और दर्शन से है. थेरवाद बौद्ध परंपरा के प्रमुख ग्रंथों का विशाल साहित्य पाली में उपलब्ध है. इसलिए पाली का अध्ययन केवल भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारत की प्राचीन बौद्धिक, दार्शनिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अध्ययन भी किया जाता है.
भारत सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी सभी शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन और संस्थानों को मजबूत करने, बड़ी संख्या में अप्रकाशित पांडुलिपियों को संग्रहित, संरक्षित, अनुवादित और शोध का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है. नीति में विश्वविद्यालय परिसरों में पाली, फारसी और प्राकृत के लिए राष्ट्रीय संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया था.

पांच भाषाओं के लिए पांच सेंटर ऑफ एक्सलेंस
शिक्षा मंत्रालय के आदेश के मुताबिक:
- शास्त्रीय असमिया — तेजपुर विश्वविद्यालय, असम
- शास्त्रीय बंगाली — विश्व भारती विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल
- शास्त्रीय मराठी — डेक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट, पुणे
- शास्त्रीय पाली — सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ ओडिशा, कोरापुट
- शास्त्रीय प्राकृत — सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ गुजरात, गुजरात
इन पांचों केंद्रों की स्थापना का उद्देश्य संबंधित भाषाओं की शोध, डिजिटल संरक्षण, विरासत के संरक्षण और प्रसार की व्यवस्था को मजबूत करना है.
ओडिशा के मुख्यमंत्री ने बताया महत्वपूर्ण कदम
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय में क्लासिकल (शास्त्रीय) पाली के सेंटर्स ऑफ एक्सलेंस को मंजूरी मिलने का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि इससे पाली के अध्ययन, संरक्षण और प्रचार को मजबूती मिलेगी. मुख्यमंत्री ने पाली को भारत की बौद्धिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी भाषा बताया और कहा कि यह केंद्र भारत की सभ्यतागत ज्ञान और भाषाई विरासत के संरक्षण में ओडिशा के योगदान को और मजबूत करेगा.
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