Johar Live Desk : कर्नाटक की राजनीति के भीष्म पितामह कहे जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री भीमन्ना खंड्रे का बीती देर रात निधन हो गया। वे 102 वर्ष के थे। उन्होंने बीदर जिले के भाल्की स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके बेटे और कर्नाटक के वन मंत्री ईश्वर खांद्रे ने निधन की पुष्टि की। बताया गया कि वे पिछले दो हफ्तों से सांस लेने में तकलीफ और उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके परिवार में दो बेटे और चार बेटियां हैं।
सार्वजनिक सेवा का लंबा सफर
पेशे से वकील रहे भीमन्ना खंड्रे आजादी के तुरंत बाद सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हो गए थे। उनकी राजनीतिक यात्रा 1953 में शुरू हुई, जब वे भाल्की नगर पालिका के पहले अध्यक्ष चुने गए। उन्होंने 1962 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। वे चार बार विधायक (MLA) और दो बार विधान परिषद (MLC) के सदस्य रहे। पूर्व सीएम वीरप्पा मोइली की सरकार में उन्होंने परिवहन मंत्री के रूप में काम किया।
सहकारिता आंदोलन के मजबूत स्तंभ
भीमन्ना खंड्रे को उत्तर कर्नाटक में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने हल्लीखेड़ा में बीदर सहकारी चीनी मिल और हुंजी में महात्मा गांधी चीनी कारखाने की स्थापना में अहम भूमिका निभाई। इन संस्थानों से हजारों गन्ना किसानों को फायदा मिला। उन्होंने नारंजा और कारंजा सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे कल्याण कर्नाटक के सूखे इलाकों में पानी की सुविधा बढ़ी।
स्वतंत्रता सेनानी भी थे खांद्रे
भीमन्ना खंड्रे एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे। उन्होंने आजादी की लड़ाई में सक्रिय भागीदारी निभाई और बाद में आधुनिक भारत के निर्माण में भी योगदान दिया। बीदर जिले के विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए उन्हें सभी दलों में सम्मान मिला।
राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
भीमन्ना खंड्रे के निधन पर सीएम सिद्धारमैया, डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने शोक जताया है। कर्नाटक सरकार ने उनके दशकों के सार्वजनिक जीवन को देखते हुए राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार का फैसला किया है। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए भाल्की में रखा जाएगा।
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