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    जोहार ब्रेकिंग

    वन्यजीव तस्करों पर शिकंजा कसने की तैयारी, इन जगहों पर रहेगी कड़ी निगरानी

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkJune 24, 2026No Comments4 Mins Read
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    Ranchi : झारखंड में वन्यजीवों की तस्करी और उनसे जुड़े अपराधों पर लगाम कसने के लिए बुधवार को रांची स्थित वन भवन मुख्यालय के विवेकानंद सभागार में अहम बैठक हुई। इस बैठक में वन विभाग के साथ वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, पुलिस, सीबीआई, ईडी, सीआईएसएफ, आरपीएफ, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, इंटेलिजेंस ब्यूरो समेत कई केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मकसद था कि अलग-अलग विभाग मिलकर ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करें, जिससे वन्यजीवों की तस्करी और अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। बैठक की अध्यक्षता झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) संजीव कुमार ने की। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान बेहद जरूरी है।

    हर विभाग में होंगे नोडल अधिकारी, मामलों की होगी नियमित समीक्षा

    संजीव कुमार ने कहा कि वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए प्रत्येक विभाग में नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाने चाहिए। साथ ही महत्वपूर्ण मामलों की नियमित समीक्षा, ऑनलाइन केस मैनेजमेंट, वित्तीय जांच, अभियोजन में सहयोग और अपराधियों का अद्यतन प्रोफाइल तैयार करने जैसे कदम उठाने होंगे। उनका कहना था कि जब तक सभी एजेंसियां एक साथ काम नहीं करेंगी, तब तक वन्यजीव तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाना आसान नहीं होगा।

    हवाई अड्डे, रेलवे, सड़क और कुरियर नेटवर्क पर रहेगी कड़ी निगरानी

    बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि वन्यजीवों और उनके अंगों की तस्करी केवल सड़क मार्ग से ही नहीं होती, बल्कि हवाई अड्डों, रेलवे, डाकघरों और कुरियर सेवाओं का भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में इन सभी माध्यमों पर निगरानी बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत साझा करने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करने की जरूरत है।

    रुचिका ऋषि ने कानून और जांच प्रक्रिया की दी जानकारी

    वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, नई दिल्ली की एडिशनल डायरेक्टर आईपीएस रुचिका ऋषि ने वन्यजीव अपराधों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वन्यजीवों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पुलिस, ईडी, सीबीआई, सीआईएसएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी मिलकर काम करना होगा। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी और सुझाव दिया कि सभी एजेंसियों की ऐसी समन्वय बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए।

    झारखंड की परिस्थितियां अलग, उसी हिसाब से बनेगी रणनीति

    प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) एवं मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक राजीव रंजन ने कहा कि झारखंड की भौगोलिक स्थिति दूसरे राज्यों से अलग है। इसलिए यहां वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर रणनीति तैयार करनी होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य का वन्य प्राणी प्रभाग इस दिशा में लगातार सक्रिय है और आगे भी सभी एजेंसियों के सहयोग से काम करता रहेगा।

    सोशल मीडिया के कारण भी बढ़ रहे हैं वन्यजीव अपराध

    मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) एस. आर. नटेश ने झारखंड में वन्यजीव अपराध नियंत्रण की कार्ययोजना पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि कई बार लोग सोशल मीडिया या साइबर माध्यमों से प्रभावित होकर अनजाने में वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाले काम कर बैठते हैं। इसलिए कानून लागू करने के साथ-साथ आम लोगों के बीच व्यापक जागरूकता अभियान चलाना भी बेहद जरूरी है।

    कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

    बैठक में आरसीसीएफ डॉ. आर. थांगा पांडियान, रविंद्र नाथ मिश्रा, एसपी एसबी अरविंद कुमार सिंह, एसपी सीआईडी पूज्य प्रकाश, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के राहुल मीणा, वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो भोपाल के क्षेत्रीय उपनिदेशक पाटिल सुयोग सुभाष राव, डीएफओ रांची श्रीकांत वर्मा, ईडी की उपनिदेशक पूनम ऊषरा, आईएफएस कुमार आशीष, वन प्रमंडल पदाधिकारी अजिंक्य बनाकर, डीएफओ वन्य प्राणी रांची अवनीश चौधरी, स्टेट टैक्स के सहायक आयुक्त संजय प्रसाद, जेबीवीएनएल के पवन कुमार मिश्रा, सीआईएसएफ, आरपीएफ, आईबी, एयरपोर्ट सीआरपीएफ और रेलवे इंटेलिजेंस सहित कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने वन्यजीव अपराधों को कम करने और तस्करी रोकने के लिए साझा रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।

    Also Read : UPSC की तैयारी के लिए कोल इंडिया दे रहा 1 लाख, कौन उठा सकते हैं इसका फायदा?

    Preparations underway to crack down on wildlife smugglers; strict surveillance to be maintained in these areas. इन जगहों पर रहेगी कड़ी निगरानी वन्यजीव तस्करों पर शिकंजा कसने की तैयारी
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