Patna : जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने बिहार में हाल के दिनों में मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ कथित मॉब लिंचिंग, हिंसा और हत्या की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इस संबंध में बिहार के सीएम नीतीश कुमार को एक विस्तृत पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ तत्काल, प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई की मांग की है। अपने पत्र में मौलाना मदनी ने कहा कि महात्मा बुद्ध की भूमि बिहार सामाजिक सौहार्द, करुणा और अहिंसा की परंपरा के लिए जानी जाती रही है, लेकिन हालिया घटनाओं ने राज्य की इस ऐतिहासिक पहचान को गंभीर आघात पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि देश में नफरत फैलाने वाली मानसिकता को खुली छूट मिल रही है, जिसमें असामाजिक तत्वों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी चिंता का विषय बनती जा रही है।
मौलाना मदनी ने लिखा कि जब नफरत हिंसा, खून-खराबे और हत्या का रूप ले ले, तब राज्य की चुप्पी अत्यंत घातक सिद्ध होती है। ऐसे समय में सीएम के रूप में नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा बनाए रखना और नागरिकों के डगमगाए विश्वास को बहाल करना आपकी संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है।
पत्र में कई घटनाओं का उल्लेख
मौलाना मदनी ने अपने पत्र में बिहार की हालिया कई गंभीर घटनाओं का उल्लेख किया है। इनमें नवादा जिले में मुस्लिम कपड़ा व्यापारी मोहम्मद अतहर हुसैन के साथ की गई बर्बरता और बाद में उनकी मौत, गोपालगंज के मठिया गांव में अहमद आज़ाद को मांस रखने के शक में बिजली के खंभे से बांधकर सार्वजनिक रूप से पीटे जाने की घटना, मधुबनी जिले के चकदहा बस्ती में मोहम्मद मुर्शिद आलम को ‘बांग्लादेशी’ बताकर अपहरण, यातना और अपमान का मामला शामिल है।
इसके अलावा झंझारपुर में मामूली विवाद के बाद मोहम्मद क़य्यूम की हत्या और मधेपुरा जिले के मुरलीगंज थाना क्षेत्र के भैरवपट्टी गांव में विधवा मुस्लिम मज़दूर हिना परवीन के अपहरण, कथित सामूहिक दुष्कर्म और नृशंस हत्या की घटना का भी उन्होंने जिक्र किया।
हिना परवीन की हत्या पर गहरा आक्रोश
मौलाना मदनी ने विशेष रूप से हिना परवीन के साथ घटित जघन्य अपराध पर गहरा दुख, पीड़ा और आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि छह मासूम बच्चों की एकमात्र संरक्षक एक असहाय विधवा की इस तरह निर्मम हत्या हमारे समाज की संवेदनशीलता और प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यकुशलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सरकार से की गई प्रमुख मांगें
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सीएम से मांग की है कि इन सभी मामलों में शामिल दोषियों के खिलाफ जल्द, पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएं।
संगठन ने पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवज़ा, न्याय और पूर्ण पुनर्वास देने की भी मांग की है। इसके अलावा पुलिस और जिला प्रशासन को भीड़ द्वारा न्याय (विजिलेंटिज़्म), सांप्रदायिक प्रोफाइलिंग और कानून के उल्लंघन पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट और ठोस निर्देश जारी करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। मौलाना मदनी ने अंत में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की सभी स्थानीय इकाइयों से अपील की है कि वे पीड़ित परिवारों, विशेषकर अनाथ बच्चों और अन्य ज़रूरतमंदों की हरसंभव सहायता के लिए आगे आए।
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