रांची. JSSC CGL चयनित अभ्यर्थी न्याय मंच ने शनिवार, 12 सितंबर को रांची प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर परीक्षा विवाद पर अपना पक्ष रखा. अनिल रजक, चोंद्रो हाईबुरु, सुजीत उरांव, बिमल उरांव, अविनाश कुल्लू, निशांत बेक समेत चयनित अभ्यर्थियों ने संयुक्त बयां जारी कर कहा कि वे परीक्षा में गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना ठोस सबूत के सभी सफल अभ्यर्थियों को 35-40 लाख रुपये की कथित सेटिंग से जोड़ना गलत है.
अभ्यर्थियों ने अपने बयां में कहा कि जांच में जो दोषी मिले, उसके खिलाफ कार्रवाई हो, लेकिन कुछ लोगों की कथित गड़बड़ी के लिए पूरी परीक्षा रद्द कर निर्दोष अभ्यर्थियों को सजा नहीं दी जानी चाहिए.
मंच ने कहा कि परीक्षा के जरिए करीब 650 ST और दिव्यांग अभ्यर्थियों का भी चयन हुआ है. कई अभ्यर्थियों के लिए यह नौकरी परिवार की आर्थिक सुरक्षा का बड़ा सहारा है. ऐसे में बिना अंतिम जांच के पूरी परीक्षा रद्द करना उनके भविष्य पर गंभीर असर डाल सकता है.
अभ्यर्थियों ने यह भी दावा किया कि करीब 600 चयनित उम्मीदवार पहले से सरकारी या निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे थे. JSSC CGL की नौकरी के लिए कई लोगों ने अपनी पुरानी नौकरी, सीनियरिटी और आर्थिक सुरक्षा तक छोड़ दी. अब नियुक्ति पर संकट के कारण उनके सामने भविष्य की अनिश्चितता खड़ी हो गई है.
निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का समर्थन
चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि वे CID, SIT या किसी स्वतंत्र एजेंसी की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का पूरा समर्थन करेंगे. उनका कहना है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है, उनकी नियुक्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए.
दोषी की नियुक्ति रद्द हो, पूरी परीक्षा नहीं
अभ्यर्थियों ने नियुक्ति पत्र में मौजूद सशर्त प्रावधान का हवाला देते हुए कहा कि अगर किसी चयनित अभ्यर्थी की भूमिका जांच में सामने आती है तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है. ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द करने की जरूरत नहीं है.
उन्होंने सोशल मीडिया पर चयनित अभ्यर्थियों की तस्वीरें, रोल नंबर और दूसरी निजी जानकारियां साझा किए जाने का भी आरोप लगाया. मंच के मुताबिक, महिला चयनित अभ्यर्थियों को भी आपत्तिजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में कार्रवाई की मांग की.
अभ्यर्थियों ने सरकार से अपील की कि जांच जल्द पूरी कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन कुछ लोगों की गलती की कीमत पूरी मेरिट लिस्ट में शामिल अभ्यर्थियों से न वसूली जाए.
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