जेपीएससी में अनियमितता के मामले में आरोपी टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने सीजीएल के जरिए खुद नौकरी हासिल की. अपने भाई और भाई की पत्नी की भी नौकरी उसने लगवाई. अब यह जानकारी मिली है कि अभय ने जेपीएससी की 14 वीं सिविल सेवा परीक्षा की पीटी भी पास की थी.
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. आरोप ऐसा है, जिसे सुनकर किसी के भी होश उड़ जाएं, जिस एजेंसी पर हजारों-लाखों युवाओं के भविष्य का फैसला करने वाली परीक्षाएं कराने की जिम्मेदारी थी, उसी एजेंसी के एक मैनेजर ने कथित तौर पर परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाकर खुद को ही टॉपर बना लिया.
रांची के नगड़ी थाने में दी गई एक विस्तृत शिकायत में M/s TSR Data Processing Private Limited (TDPL) के अधिकृत प्रतिनिधि/मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी पर परीक्षा के डिजिटल सर्वर और OMR शीट में कथित हेरफेर के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर खुद को पांच अलग-अलग महत्वपूर्ण परीक्षाओं में सफल कराया और अपने संपर्क में आए अन्य अभ्यर्थियों को भी मेरिट लिस्ट में जगह दिलाने के लिए एक पूरा सिंडिकेट खड़ा किया.
JSSC-CGL में Rank-2, शिक्षक भर्ती में भी अंतिम चयन का दावा
शिकायत में लगाए गए आरोपों के मुताबिक, अभय कुमार तिवारी ने कथित तौर पर परीक्षा एजेंसी के सिस्टम और OMR डेटा का दुरुपयोग करते हुए पांच परीक्षाओं में सफलता हासिल की.
इनमें JSSC-CGL-2023 में रोल नंबर 1237696 के साथ Rank-2 हासिल कर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) के पद पर चयनित होने का दावा किया गया है. इसके अलावा PGTTCE-2023 शिक्षक भर्ती में रोल नंबर 10309146 के जरिए अंतिम चयन और पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर स्थित +2 उच्च विद्यालय में अंग्रेजी शिक्षक के रूप में पदस्थापना का भी आरोप है.
शिकायत के मुताबिक, वह ACF (PT) Exam-2024, FRO (PT) Exam-2024 और FSO Written Exam-2023 में भी सफल हुआ. अगर ये आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति के चयन का नहीं रहेगा, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और निगरानी तंत्र पर बड़ा सवाल खड़ा होगा.
500 से ज्यादा OMR शीट में हेरफेर का आरोप
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप OMR शीट से छेड़छाड़ को लेकर है. दावा किया गया है कि वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) परीक्षा की करीब 350 और सहायक वन संरक्षक (ACF) परीक्षा की करीब 150 OMR शीट में परीक्षा के बाद कथित तौर पर भौतिक रूप से रंगाई या शीट बदलने का काम किया गया.
आरोप यह भी है कि एजेंसी से जुड़े प्रोग्रामरों उस्मान और अवध की मदद से कथित तौर पर मुख्य सर्वर के बैकएंड में जाकर कुछ अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाए गए. इसके जरिए कथित सिंडिकेट से जुड़े अभ्यर्थियों को मेरिट लिस्ट में जगह दिलाई गई.
पास कराने के नाम पर लाखों की उगाही का भी आरोप
शिकायत में परीक्षा पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूलने का आरोप भी लगाया गया है. इतना ही नहीं, कथित तौर पर अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, हस्ताक्षरित खाली स्टाम्प पेपर और कैंसिल चेक तक जमा कराए गए, ताकि उन पर दबाव बनाए रखा जा सके.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर परीक्षा कराने वाली एजेंसी से जुड़ा कोई व्यक्ति ही परीक्षा में बैठकर सफल हो रहा था, तो क्या परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की निगरानी में कोई प्रभावी जांच और सुरक्षा व्यवस्था थी?
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को संवेदनशील काम कैसे मिलता रहा?
इस पूरे मामले में एक और बड़ा सवाल TDPL की कथित ब्लैकलिस्टिंग को लेकर उठ रहा है. शिकायत में दावा किया गया है कि JSSC ने मई 2025 में TDPL को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था. इसके बावजूद इस कंपनी से JPSC और JSSC के संवेदनशील कार्य कराए जाने को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं.
अब पुलिस के सामने शिकायत की जांच से जुड़े कई अहम सवाल हैं, क्या सचमुच OMR शीट बदली गईं? क्या सर्वर के बैकएंड में जाकर अंक बढ़ाए गए? क्या किसी संगठित गिरोह ने परीक्षा परिणाम प्रभावित किए? और सबसे अहम, क्या इस कथित महाघोटाले का दायरा सिर्फ पांच परीक्षाओं तक सीमित है या फिर इसके तार कई और परीक्षाओं से जुड़े हैं?
शिकायतकर्ता ने पुलिस से आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, पेपर लीक, कूटरचना और मनी लॉन्ड्रिंग समेत अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर पूरे मामले की गहन जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

