NEET-UG 2026 से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई को लेकर सामने आई खबरों पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जताई है. CJI ने साफ कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर कोई औपचारिक रिट याचिका दाखिल ही नहीं हुई थी. ऐसे में यह कहना कि उन्होंने किसी याचिका को सुनने या सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया, गलत है.
CJI सूर्यकांत ने कहा कि पिछले दो दिनों से मीडिया में यह खबर चल रही है कि एक मामला सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुआ था और मुख्य न्यायाधीश ने उसे सूचीबद्ध करने से मना कर दिया. उन्होंने ऐसी रिपोर्टिंग को गैर-जिम्मेदाराना और लापरवाह बताया.
दरअसल, NEET-UG 2026 में कथित पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और NTA में सुधार जैसी मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन चल रहा था. प्रदर्शनकारी छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी कर रहे थे. 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हुआ.
प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर कथित ज्यादती और सख्ती के आरोप लगाए गए. इसी कार्रवाई के खिलाफ न्यायिक हस्तक्षेप की मांग उठी और मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने मौखिक तौर पर रखा गया.
मीडिया में चली ‘सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार’ की खबर
22 जुलाई को इस मामले का सुप्रीम कोर्ट में उल्लेख किया गया. इसके बाद मीडिया के एक हिस्से में खबर चली कि पुलिस कार्रवाई के खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी, लेकिन CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई या लिस्टिंग से इनकार कर दिया.
कुछ रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि वकील ने पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो अदालत के सामने रखने की बात कही थी. इस पर CJI की ओर से कथित तौर पर कहा गया कि अदालत के पास वीडियो देखने का समय नहीं है.
इसके बाद खबरों का मुख्य नैरेटिव यही रहा कि सुप्रीम कोर्ट ने NEET छात्रों के आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया.
एक पन्ना भी नहीं हुआ था दाखिल
अब CJI सूर्यकांत ने इसी रिपोर्टिंग पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने साफ कहा कि उस समय सुप्रीम कोर्ट में कोई औपचारिक रिट याचिका दाखिल नहीं हुई थी. उनके मुताबिक, सिर्फ एक लेटर रिप्रेजेंटेशन का उल्लेख किया गया था.
CJI ने कहा, “सुबह 10 बजे तक एक भी पन्ना दाखिल नहीं हुआ था. यह सिर्फ एक रिप्रेजेंटेशन था. मैं उस रिप्रेजेंटेशन को रिट याचिका कैसे मान सकता हूं? और लोग इस तरह गैर-जिम्मेदाराना तरीके से रिपोर्टिंग शुरू कर देते हैं.”
CJI का कहना है कि जब अदालत के सामने कोई औपचारिक याचिका थी ही नहीं, तो यह कहना सही नहीं है कि उन्होंने किसी याचिका की सुनवाई या उसे सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया.
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