किसलय शानू
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली और अभ्यर्थियों के परिणाम में हेरफेर के मामले में जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण नाम सामने आया है. यह नाम मोहम्मद उस्मान का है, जिसे सीआईडी ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं की तकनीकी कड़ी बताया है.
जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, उस्मान का काम केवल एक निजी तकनीकी कंपनी में प्रोग्रामर तक सीमित नहीं था, बल्कि JPSC की परीक्षाओं से जुड़े संवेदनशील डेटा, OMR शीट, उत्तरपुस्तिकाओं और परिणामों की तकनीकी प्रक्रिया में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी.
जेपीएससी घोटाले को लेकर हम जोहार लाइव की 7वीं कड़ी में आरोपी मो. उस्मान के चार्जशीट को विस्तार से बता रहे हैं. जिसे सीआईडी ने कोर्ट के समक्ष पेश किया है. हालांकि जोहार लाइव ने 13 सितंबर को उस्मान के बारे में पूरी जानकारी दी थी.
सीआईडी जांच के अनुसार, मोहम्मद उस्मान TSR Data Processing Pvt. Ltd. (TDPL) में तकनीकी कर्मी और प्रोग्रामर के रूप में काम करता था. इसके साथ ही वह Picar Technology Pvt. Ltd. का निदेशक भी था. पुलिस ने उसे 22 जुलाई 2026 को JPSC कार्यालय, रांची से गिरफ्तार किया था. वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के संभल जिले का रहने वाला है और रांची में लालपुर थाना क्षेत्र के वर्धमान कंपाउंड स्थित TDPL के आवासीय-सह-कार्यालय परिसर में रहता था.

जांच में आरोप लगाया गया है कि TDPL के निदेशकों, कर्मचारियों, JPSC के कुछ पदाधिकारियों और कथित बिचौलियों के बीच संगठित गठजोड़ के जरिए परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर किया जाता था. इस कथित नेटवर्क में उस्मान को प्रमुख तकनीकी व्यक्ति बताया गया है. पुलिस के अनुसार, परीक्षा के बाद चयनित अभ्यर्थियों की OMR शीट में खाली छोड़े गए गोलों को भरा जाता था. इसके अलावा मुख्य परीक्षा की बारकोड युक्त उत्तरपुस्तिकाओं में PDF एडिटर के माध्यम से अंक बढ़ाने और बैकएंड सर्वर के डेटा में बदलाव करने के आरोप भी जांच में सामने आए हैं.
क्लाउड सर्वर पर सुरक्षित था JPSC परीक्षाओं का डेटा
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू JPSC की परीक्षाओं से संबंधित डेटा का निजी क्लाउड खाते में सुरक्षित रखा जाना है. जांच के मुताबिक, आयोग की परीक्षाओं का OTR, OSM, स्कैन की गई OMR शीट और परिणामों से जुड़ा डेटा Amazon Web Services (AWS) के एक खाते में रखा गया था. यह खाता मोहम्मद उस्मान के नाम पर पंजीकृत था, जबकि कंपनी के नाम वाले कॉलम में TDPL का उल्लेख था.
Amazon Web Services से प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित क्लाउड खाता 20 नवंबर 2025 को बनाया गया था. इसकी भुगतान व्यवस्था में उस्मान के नाम से जारी Visa क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया गया था. पुलिस का दावा है कि इस खाते के माध्यम से JPSC की गोपनीय परीक्षा सामग्री तक पहुंच संभव थी.
जांच के दौरान उस्मान ने क्लाउड खाते का यूजरनेम और पासवर्ड उपलब्ध कराया, जिसके आधार पर पुलिस ने उसमें सुरक्षित डेटा की जांच की. इसी जांच में OMR शीट से संबंधित कथित विसंगतियां सामने आईं. पुलिस का आरोप है कि JPSC की गोपनीय परीक्षा सामग्री आयोग के प्रत्यक्ष नियंत्रण से बाहर एक निजी खाते में रखी गई थी. यह व्यवस्था परीक्षा की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है.
OMR शीट में हेरफेर का मामला
जांच में अभ्यर्थी सुमन सौरन की OMR शीट को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया गया है. पुलिस के अनुसार, अभ्यर्थी की वायरल कार्बन कॉपी में केवल 48 प्रश्नों के उत्तर भरे हुए दिखाई दे रहे थे, जबकि क्लाउड सर्वर पर सुरक्षित स्कैन की गई मूल OMR शीट में सभी प्रश्नों के उत्तर अंकित पाए गए.
जांच में यह भी पाया गया कि कार्बन कॉपी में जिन प्रश्नों के गोले भरे हुए थे, वे मूल OMR शीट से मेल खाते थे, लेकिन कार्बन कॉपी में खाली छोड़े गए प्रश्नों के गोले मूल OMR में भरे हुए थे. इस अंतर को जांच एजेंसी ने परीक्षा के बाद OMR शीट में संभावित छेड़छाड़ का महत्वपूर्ण संकेत माना है.
इसी तरह अरविंद कुमार की 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा से संबंधित उत्तरों का भी विश्लेषण किया गया. जांच के अनुसार, उसने पहले प्रश्नपत्र में 85 और दूसरे प्रश्नपत्र में 87 प्रश्न हल किए थे. लेकिन महज 27 दिनों बाद समान पाठ्यक्रम वाली बैकलॉग परीक्षा में उसके द्वारा हल किए गए प्रश्नों की संख्या 123 दर्ज की गई.

पुलिस का दावा है कि अरविंद कुमार की 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा की OMR शीट पहले खाली छोड़ी गई थी और बाद में उसमें बदलाव कर उसे सफल अभ्यर्थियों की सूची में शामिल कराने की कोशिश की गई.
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श्वेता गुप्ता से 35 दिन में 674 बार किया फोन
मोहम्मद उस्मान और JPSC की तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभारी श्वेता कुमारी गुप्ता के बीच संपर्क भी जांच का अहम हिस्सा है. कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के अनुसार, 17 जून 2025 से 21 जुलाई 2026 के बीच दोनों के बीच 674 बार संपर्क हुआ. यानी हर दिन लगभग 20 दफा दोनों की फोन पर बातचीत हुई है.
जांच एजेंसी के मुताबिक, श्वेता कुमारी गुप्ता के मोबाइल से प्राप्त WhatsApp चैट में उस्मान के साथ बातचीत के कई महत्वपूर्ण अंश मिले हैं. इनमें 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर कुंजी साझा किए जाने का उल्लेख है. आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, ऐसी गोपनीय सामग्री औपचारिक माध्यम से हार्ड कॉपी या पेनड्राइव के जरिए साझा की जानी चाहिए थी.
चैट में अभ्यर्थी सौरभ सुमन की वायरल OMR शीट, बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों के चयन और प्रारंभिक परीक्षा में क्रमवार रोल नंबर के चयन से संबंधित चर्चा भी मिलने का दावा किया गया है.
इसके अतिरिक्त APP नियमित, APP बैकलॉग और सिविल जज (कनीय) की प्रारंभिक परीक्षाओं में सफल अभ्यर्थियों की श्रेणीवार संख्या आधिकारिक घोषणा से पहले साझा किए जाने की बात भी सामने आई है. एक बातचीत में अलग-अलग राज्यों से संबंधित अभ्यर्थियों की संख्या का उल्लेख था. इसमें बिहार से 146, उत्तर प्रदेश से 82 और हरियाणा से 14 अभ्यर्थियों सहित कुल 267 की संख्या दर्ज थी.
मौज मस्ती के लिए 10 बार हवाई यात्रा
जांच में श्वेता कुमारी गुप्ता और उनके परिजनों के लिए हवाई टिकट बुक कराने का मामला भी सामने आया है. पुलिस के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच उस्मान ने अपने ई-मेल और अन्य बुकिंग विवरणों का इस्तेमाल करते हुए परीक्षा नियंत्रक प्रभारी और उनके परिजनों के लिए कई हवाई यात्राओं की व्यवस्था की.
जोहार लाइव ने इसका खुलासा 27 अगस्त को ही कर दिया था.
MakeMyTrip से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच श्वेता कुमारी गुप्ता, उनके पति विक्रम मेघवाल, पिता भगवान गुप्ता और माता कुसुम गुप्ता के नाम पर लगभग 10 हवाई यात्राओं की बुकिंग की गई थी. इनमें रांची, बेंगलुरु, दिल्ली और हैदराबाद के बीच की यात्राएं शामिल थीं.

IndiGo से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, श्वेता कुमारी गुप्ता के माता-पिता की 4 मई 2026 को बेंगलुरु से रांची की यात्रा की बुकिंग भी उसी ई-मेल से की गई थी, जिसका इस्तेमाल उस्मान करता था. इसके अलावा 28 मई 2026 को श्वेता कुमारी गुप्ता, उनके पति और TDPL निदेशक रामबीर सिंह की रांची से हैदराबाद की यात्रा का भी उल्लेख जांच में किया गया है.
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29 लाख से अधिक रुपयों का हुआ लेन-देन
जांच में सामने आए बैंक खातों के लेनदेन के अनुसार, JPSC परीक्षा से जुड़े मामले के आरोपी मोहम्मद उस्मान के व्यक्तिगत खातों और उससे जुड़ी कंपनी के खातों में अलग-अलग स्रोतों से लाखों रुपये आए. जांच रिपोर्ट के मुताबिक, अभय कुमार तिवारी के साले सौरभ पांडेय की फर्म से उस्मान के खाते में दो बार में कुल 2 लाख रुपये जमा किए गए.
वहीं, अभय कुमार तिवारी की ओर से 20 हजार रुपये भेजे गए. TDPL कंपनी की ओर से उस्मान के खाते में अलग-अलग तारीखों पर कुल 8 लाख 49 हजार 767 रुपये जमा किए गए. इसके अलावा Picar Technology कंपनी से उसके खाते में कुल 13 लाख 51 हजार 200 रुपये आए. सह अभियुक्त हेमंत कुमार वर्मा ने भी उसे 70 हजार रुपये भेजे. इस तरह इन स्रोतों से उसके खातों में कुल 24 लाख 90 हजार 967 रुपये जमा होने का उल्लेख है.
इसके अतिरिक्त TDPL ने Picar Technology कंपनी के खाते में भी 50 हजार रुपये भेजे थे. जांच में 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के साक्षात्कार के दौरान रांची में उस्मान के खाते में तीन बार में कुल 2 लाख 10 हजार रुपये नकद जमा होने की बात सामने आई. इसमें से 1 लाख 55 हजार रुपये उसके दूसरे खाते में ट्रांसफर किए गए. वहीं, FRO मुख्य परीक्षा के आसपास भी उसके खाते में दो बार में कुल 1 लाख 90 हजार रुपये नकद जमा किए गए.
इस प्रकार जांच रिपोर्ट में बताए गए सभी जमा लेनदेन को जोड़ने पर कुल 29 लाख 40 हजार 967 रुपये की रकम सामने आती है. इसके अलावा उस्मान ने Picar Technology के निदेशक मोहम्मद नासिर को अपने खाते से दो बार में कुल 2 लाख 50 हजार रुपये भी भेजे थे.


