रांची: झारखंड में किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने के लिए HPV (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) टीकाकरण को लेकर राज्य सरकार ने नई पहल की है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस संबंध में व्यापक अध्ययन कराने, राज्यव्यापी सर्वेक्षण करने और विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि टीकाकरण के क्रियान्वयन को लेकर कोई भी निर्णय लेने से पहले इसके वैज्ञानिक, तकनीकी, चिकित्सकीय और सुरक्षा संबंधी सभी पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा. देश-विदेश के चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श लेने के बाद ही सरकार आगे का निर्णय लेगी.
बुधवार को झारखंड मंत्रालय में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की बेटियों और महिलाओं का स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है और इसकी रोकथाम के लिए सरकार पूरी संवेदनशीलता एवं गंभीरता के साथ आवश्यक कदम उठाएगी.
सर्वाइकल कैंसर के मरीजों का होगा राज्यव्यापी सर्वे
बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि झारखंड में सर्वाइकल कैंसर के अनुमानित मामले प्रति एक लाख आबादी पर 13 हैं. मुख्यमंत्री ने इस आंकड़े की विस्तृत जानकारी जुटाने के लिए पूरे राज्य में सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया.
सर्वेक्षण के दौरान सर्वाइकल कैंसर से प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या, उनकी आयु, बीमारी के अलग-अलग चरण (स्टेज) और सक्रिय मामलों का विस्तृत आंकड़ा जुटाया जाएगा. इसके आधार पर समग्र रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
मुख्यमंत्री ने इस विषय पर विशेषज्ञ समिति गठित करने और देश-विदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के निदेशकों, कैंसर विशेषज्ञों तथा संबंधित विषय के जानकारों से परामर्श लेने को कहा. उन्होंने निर्देश दिया कि सभी तथ्यों और विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही HPV टीकाकरण के क्रियान्वयन को लेकर आगे निर्णय लिया जाए.
मुख्यमंत्री ने सर्वाइकल कैंसर की समय पर पहचान और रोकथाम के लिए स्क्रीनिंग व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया. उन्होंने जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में पैप स्मीयर टेस्ट तथा HPV DNA टेस्ट जैसी जांच सुविधाओं की उपलब्धता और पहुंच बेहतर बनाने का निर्देश दिया. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को इस बीमारी के प्रति जागरूकता अभियान चलाने और लोगों तक प्रमाणिक जानकारी पहुंचाने को कहा, ताकि समाज में किसी तरह की अफवाह या भ्रांति की स्थिति उत्पन्न न हो.
RIMS में 319 मेडिकल शिक्षकों के पदों का होगा पुनर्गठन
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई. संस्थान में मेडिकल शिक्षकों के 319 स्वीकृत पदों के पुनर्गठन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया. इसके तहत 7 सुपर स्पेशियलिटी और 3 ब्रॉड स्पेशियलिटी विभागों के सृजन की योजना है. इसके अलावा 16 नए पद सृजित करने का प्रस्ताव भी रखा गया.
प्रस्ताव के अनुसार, प्राध्यापक के वर्तमान 44 पदों को घटाकर 42 और अपर प्राध्यापक के 9 पदों को घटाकर 8 करने की योजना है. वहीं, सह-प्राध्यापक के पद 95 से बढ़ाकर 96 और सहायक प्राध्यापक के पद 170 से बढ़ाकर 172 करने का प्रस्ताव है. सहायक प्राध्यापक-सह-सांख्यिकी का एक पद यथावत रहेगा. इस पुनर्गठन के बाद भी मेडिकल शिक्षकों के स्वीकृत पदों की कुल संख्या 319 ही रहेगी.
मुख्यमंत्री ने RIMS में मरीजों को बेहतर इलाज और मेडिकल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया. बैठक में संस्थान की OPD व्यवस्था, मेडिकल सीटों, छात्रावासों और विभिन्न विभागों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की भी समीक्षा हुई.
बैठक में हजारीबाग, दुमका और पलामू स्थित मेडिकल कॉलेजों की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय व्यवस्था की भी जानकारी ली गई. इन संस्थानों में आधारभूत संरचना, मेडिकल शिक्षकों की उपलब्धता, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य आवश्यक संसाधनों पर चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने राज्य में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के साथ आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए समन्वित प्रयास करने का निर्देश दिया.
अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और एम्बुलेंस सेवाओं की समीक्षा
बैठक में मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के क्रियान्वयन की भी समीक्षा हुई. अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को मिलने वाले स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी. योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने और आयुष्मान भारत योजना के साथ इसके समन्वय पर चर्चा हुई.
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ प्रभावी तरीके से पहुंचे और इलाज के दौरान जरूरतमंद लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो.
सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता और संचालन की स्थिति पर भी चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए एम्बुलेंस व्यवस्था को और मजबूत बनाने का निर्देश दिया.
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए. इसके लिए आधारभूत संरचना, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता, चिकित्सा शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार जरूरी है.
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, विशेष सचिव नेहा अरोड़ा, स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के निदेशक और भवन निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.


