रांची: झारखंड में सड़क हादसे और मौत रोकने की पूरी योजना फाइलों में धरी रह गई. सरकार ने ब्लैकस्पॉट पर सीसीटीवी लगाने, पहाड़ी इलाकों में हादसे रोकने को लेकर कई योजनाएं बनायी थी. लेकिन सिर्फ एक अफसर की लापरवाही से सारी योजनाएं फाइलों में लटकी रही. सरकार के स्तर से शोकॉज भी मांगा गया, लेकिन अधिकारी ने पहली बार शोकॉज का जवाब तक नहीं दिया. अब दुबारा गुरुवार को शोकॉज कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है.
166.92 करोड़ की योजनाएं, फिर भी काम अधूरा
10 अक्टूबर 2025 को मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबंधन समिति की बैठक हुई थी. इसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सड़क हादसों और मौतों को कम करने के उद्देश्य से 166.92 करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी गई थी.
इनमें ब्लैकस्पॉट और संवेदनशील जगहों पर CCTV, SVD और ANPR कैमरे लगाने के लिए 55 करोड़ रुपये, सड़क सुरक्षा उपकरणों की खरीद के लिए 54.20 करोड़ रुपये, Automated Testing Tracks के लिए 20 करोड़ रुपये और सड़क सुरक्षा संकेतक व Unipole के लिए 15 करोड़ रुपये शामिल हैं.
इसके अलावा Road Safety Call Center के लिए 7.01 करोड़ रुपये, 24 इंटरसेप्टर वैन के लिए 5.76 करोड़ रुपये, ट्रैफिक पार्क के लिए 3 करोड़ रुपये और दो रोड सेफ्टी इंफोर्समेंट पॉइंट के लिए 3 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे. सड़क सुरक्षा जागरूकता पर 2.50 करोड़ रुपये, ऑडियो-वीडियो संदेशों पर 2.25 करोड़ रुपये, वाहन वजन प्रणाली पर 75 लाख रुपये, कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर 25 लाख रुपये और E-Challan के लिए कंप्यूटर खरीद पर 20 लाख रुपये का प्रावधान किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी दिया हवाला
परिवहन विभाग ने शोकॉज में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी हवाला दिया है. विभाग के मुताबिक, कोर्ट ने Intelligent Traffic Management System यानी ITMS और इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट जैसी व्यवस्थाओं को जल्द और प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया है.
ऐसे में सड़क सुरक्षा से जुड़ी इन योजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं होना विभाग ने गंभीर मामला माना है. विभाग का कहना है कि हादसों को रोकने के लिए जरूरी व्यवस्थाओं को समय पर जमीन पर उतारना जरूरी है.
इस मामले में विभाग ने 31 जुलाई 2026 को भी परिवहन आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा था. उन्हें तीन दिनों के भीतर जवाब देना था, लेकिन तय समय में कोई जवाब नहीं मिला. अब दोबारा शोकॉज जारी कर इस देरी का कारण भी पूछा गया है.
छह बिंदुओं पर तीन दिन में देना होगा जवाब
नए शोकॉज में परिवहन आयुक्त से छह बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है. उनसे 10 अक्टूबर 2025 को मंजूर योजनाओं की वर्तमान स्थिति और अब तक हुई प्रगति का पूरा ब्योरा मांगा गया है. साथ ही योजनाएं लंबित क्यों हैं और देरी की वास्तविक वजह क्या है, यह भी बताना होगा. योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए परिवहन आयुक्त के स्तर से क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी भी मांगी गई है.
दूसरे विभागों और कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ हुए पत्राचार और कार्रवाई का विवरण भी देना होगा. सभी योजनाओं को जल्द पूरा करने के लिए समय-सीमा वाला Action Plan भी मांगा गया है. इसके अलावा 31 जुलाई को जारी पहले शोकॉज का जवाब समय पर क्यों नहीं दिया गया, इसका भी स्पष्ट कारण बताना होगा. शोकॉज की कॉपी मुख्य सचिव कार्यालय और परिवहन मंत्री के आप्त सचिव को भी भेजी गई है.
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