विजय उरांव
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में झारखंड के धनबाद ने राजधानी रांची को पीछे छोड़ दिया है. बीते 7 सितंबर को जारी नतीजों में धनबाद को 174.5 अंक के साथ 18वीं रैंक मिली, जबकि रांची 162.5 अंक लेकर 27वें स्थान पर रहा. दोनों शहरों के बीच 12 अंक का अंतर है. लेकिन इस कहानी का दिलचस्प पहलू यह है कि यह रैंकिंग सीधे तौर पर यह नहीं बताती कि धनबाद की हवा रांची से साफ है.
साल 2025-26 के सरकारी आंकड़ों में रांची का औसत PM10 स्तर 109 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जबकि धनबाद में यह 135 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया. यानी हवा में PM10 की मात्रा के लिहाज से रांची की स्थिति धनबाद से बेहतर रही, फिर भी प्रदूषण नियंत्रण के उपायों के आकलन में धनबाद आगे निकल गया.
इसका जवाब स्वच्छ वायु सर्वेक्षण की प्रकृति में छिपा है. स्वच्छ वायु सर्वेक्षण हवा की शुद्धता का सीधा टेस्ट नहीं है. यह नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत शहरों में किए जा रहे वायु प्रदूषण नियंत्रण के कामों और शहर आधारित क्लीन एयर एक्शन प्लान्स के क्रियांवयन का सालाना आकलन है. केंद्र सरकार के मुताबिक इसका मकसद शहरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, नए उपायों को प्रोत्साहित करना और वायु प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई तेज करना है. साल 2026 में देश के 130 शहरों का आकलन (assessment) किया गया.
यानी धनबाद को 174.5 अंक मिलने का अर्थ यह नहीं है कि वहां की हवा रांची से ज्यादा साफ है. इसका अर्थ यह है कि सर्वे के तय मानकों पर धनबाद ने प्रदूषण के स्रोतों से निपटने और अपने क्लीन एयर एक्शन प्लान को लागू करने में रांची से बेहतर प्रदर्शन किया.
पर्यावरणविद नीतीश प्रियदर्शी इस पूरी रिपोर्ट और रैंकिंग पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं. वो कहते हैं, ‘’ये जो रिपोर्ट आया है इसको विश्वास करने का संभावना कम है. धनबाद इतना ओपन कोल माइन एरिया है, वहां एयर पॉल्युशन ज्यादा है. हरियाली कम होने से पहले ही तुलना में रांची का एयर पॉल्युशन गड़बड़या जरूर है, लेकिन धनबाद से ठीक है.’’
वो आगे कहते हैं, ‘’इस रिपोर्ट पर इसलिए कंफ्यूजन हो रहा है, क्योंकि रातू रोड में सबसे बढ़िया दिखाया गया है. रातू रोड सबसे ज्यादा पॉल्यूटेड है. इस नाते इस रिपोर्ट पर नहीं जाया जा सकता है. दुबारा रिसर्च करने की जरूरत है. रांची एयर के मामले में दिल्ली वैगरह से तो बेहतर है लेकिन दिल्ली को अच्छा दिखाया गया है. धनबाद का तो खैर, एयर पॉल्युशन ज्यादा रहा है. इस रिपोर्ट में लग रहा है कि कहीं कुछ छूट रहा है.’’
उन्होंने कहा, ‘’ऐसे धनबाद से रांची में ज्यादा एयर पॉल्युसन है तो इसमें प्रश्न चिन्ह लगता है. यह भी निर्भर करता है कि उन्होंने सैंपलिंग कहां से लिया है.’’
नीतीश कहते हैं, ‘’रांची की पब्लिक ये स्वीकार नहीं कर पा रही है कि दिल्ली रांची से बढ़िया है, एयर के मामले पर. सब कोई हंस रहा है. क्या क्रायटेरिया है पता नहीं, कुछ लोग कह रहे हैं कि यह पॉलिटिकली मोटिवेटेड है. दिल्ली बढ़िया है और रांची खराब है.’’
उन्होंने यह भी कहा कि पहले रांची लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए आते थे. अभी भी आते हैं. एक रिपोर्ट आया था कि रांची के लोगों का लंग, दिल्ली के लोगों के लंग से ज्यादा स्ट्रोंग है, क्योंकि एयर पोल्युशन नहीं. अब रिपोर्ट आ रहा है कि एयर पोल्युटेड है. ये लोग नापे क्या है ये समझ नहीं आ रहा है.
असर नामक संस्था झारखंड में बीते चार सालों से पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रही है. वह धनबाद जिला प्रशासन के साथ मिलकर एऩकैप प्रोग्राम के तहत जिला प्रशासन को सहयोग भी कर रही है. संस्था की अंकिता ज्योति कहती हैं, ‘’धनबाद की रैंकिंग इसलिए अच्छी है क्योंकि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में जो क्राटटेरिया हैं, जैसे पर सड़क की धूल, कचरा और बायोमास जलाना, वाहनों से होने वाला प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल और मलबा, दूसरे स्थानीय प्रदूषण स्रोत और जन-जागरूकता पूरा करते हैं. रांची उन क्रायटेरिया को कम पूरा किया इसलिए कम अंक मिले हैं. हो सकता है कि रांची की हवा धनबाद से बेहतर हो, लेकिन फिर भी रांची धनबाद से रैंक में कम आयेगा.’’
सर्वेक्षण की शुरूआत कब से हुई
भारत में शहरों के वायु प्रदूषण से निपटने के लिए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) जनवरी 2019 में शुरू किया गया था. इसके तहत प्रदूषण प्रभावित शहरों के लिए शहर आधारित क्लीन एयर एक्शन प्लान्स तैयार किए गए. आगे चलकर शहरों के इन प्रयासों और Action Plans के implementation को आपस में compare करने के लिए स्वच्छ वायु सर्वेक्षण शुरू किया गया. केंद्र सरकार के अनुसार मौजूदा स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2022-23 में शुरू हुआ और 2026 में इसका पांचवां संस्करण हुआ.
सर्वे में किन चीजों को देखा जाता है?
सर्वे में शहर की हवा में प्रदूषक कितने हैं, यह अकेला आधार नहीं है. शहर में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को कम करने के लिए किए गए उपायों और Action Plan के implementation को देखा जाता है. इसमें प्रमुख तौर पर सड़क की धूल, कचरा और बायोमास जलाना, वाहनों से होने वाला प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल और मलबा, दूसरे स्थानीय प्रदूषण स्रोत और जन-जागरूकता से जुड़े उपाय शामिल हैं. PRANA पोर्टल पर NCAP के तहत इन गतिविधियों की physical और financial progress भी दर्ज की जाती है.
यही वजह है कि किसी शहर की PM10 स्थिति बेहतर होने के बावजूद वह सर्वे की ranking में पीछे हो सकता है.
अब आते हैं रांची की हवा की स्थिति पर
रांची की वास्तविक हवा की गुणवत्ता को देखें तो केंद्र सरकार की ओर से 2025-26 के लिए जारी 130 शहरों के आंकड़ों में रांची का औसत PM10 concentration 109 µg/m³ दर्ज हुआ. राष्ट्रीय ambient air quality standard PM10 के लिए 60 µg/m³ है. यानी रांची का औसत PM10 स्तर मानक से काफी ऊपर है.
इसका साफ मतलब है कि रांची की हवा बहुत साफ तो नहीं है, लेकिन धनबाद से बेहतर जरूर है. क्योंकि धनबाद का 2025-26 का औसत PM10 135 µg/m³ रहा. यानी धनबाद में PM10 का स्तर रांची से करीब 24 प्रतिशत ज्यादा रहा. इसके बावजूद स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में धनबाद 18वें और रांची 27वें स्थान पर रहा.
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