रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग में लंबे समय से खाली पड़े अध्यक्ष और सदस्यों के पदों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं. अदालत ने सरकार को दो महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने को कहा है. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी कोर्ट को आश्वस्त किया गया कि तय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की. यह मामला वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी से जुड़े स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें अदालत ने जेपीएससी में रिक्त पड़े पदों पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था.
दो महीने में पूरी होगी प्रक्रिया
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता रोहित राय और अधिवक्ता विभोर मयंक ने अदालत को बताया कि जेपीएससी के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया अगले दो महीनों में पूरी होने की पूरी संभावना है.
सरकार के इस जवाब के बाद हाईकोर्ट ने समयसीमा तय करते हुए 18 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी.
अदालत ने जताई थी कड़ी नाराजगी
इससे पहले 3 सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान भी हाईकोर्ट ने सरकार से तीखे सवाल किए थे. अदालत ने पूछा था कि आयोग के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया कब शुरू होगी और इसे कब तक अमलीजामा पहनाया जाएगा. कोर्ट ने दो टूक कहा था कि जेपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और इसके अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद को लंबे समय तक खाली नहीं छोड़ा जा सकता.
उल्लेखनीय है कि JPSC के अध्यक्ष का पद 21 जुलाई 2026 से खाली है. पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते के कार्यकाल पूरा होने या हटने के बाद से यह पद रिक्त चल रहा है, जिससे आयोग के कामकाज पर भी असर पड़ रहा है.
ACF और RFO परीक्षा का भी उठा मामला
सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि सहायक वन संरक्षक (ACF) और रेंज वन अधिकारी (RFO) की परीक्षा प्रक्रिया को सरकार द्वारा रद्द कर दिया गया है. वन विभाग में अमले की कमी से जुड़े मामले में इन परीक्षाओं और नियुक्तियों का संदर्भ भी अदालत के सामने रखा गया.
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