कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में उनकी जनसभा के बाद हुए कथित शुद्धीकरण को लेकर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को फिर पत्र लिखा है. खरगे ने कहा कि घटना को 24 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक संबंधित संगठन और लोगों के खिलाफ FIR दर्ज नहीं हुई है.
क्या है पूरा मामला?
पिछले महीने 8 अगस्त को खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में विजय शंखनाद रैली को संबोधित किया था. दो दिन बाद, 10 अगस्त को उसी जगह गंगाजल का छिड़काव, धुलाई और हवन किया गया. इसे कथित तौर पर शुद्धीकरण बताया गया. आयोजन में श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास और हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोगों के शामिल होने की बात सामने आई थी.
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि खरगे के दलित होने के कारण उनके मंच से जाने के बाद मैदान का शुद्धीकरण किया गया, जो छुआछूत और जातिगत भेदभाव को दर्शाता है. पार्टी ने इसे संविधान के अनुच्छेद 17 में प्रतिबंधित अस्पृश्यता की मानसिकता से जोड़ा.
नड्डा के आश्वासन की दिलाई याद
खरगे ने पत्र में 13 अगस्त को राज्यसभा में उठाए गए मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय जेपी नड्डा ने घटना की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था. नड्डा ने यह भी कहा था कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती. राज्यसभा सभापति ने भी घटना पर दुख जताया था.
हालांकि, 26 अगस्त को उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने शुद्धीकरण का बचाव करते हुए कहा कि मैदान में ऐसे नारे और गतिविधियां हुई थीं, जो उसकी धार्मिक मर्यादा के अनुरूप नहीं थीं. उन्होंने कहा कि शुद्धीकरण को खरगे की जाति से जोड़ना सही नहीं है.
राहुल गांधी ने भी उठाया था मुद्दा
इसके बाद 29 अगस्त को राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कार्रवाई की मांग की. उन्होंने इसे छुआछूत बताते हुए FIR और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की. कांग्रेस ने उत्तराखंड में प्रदर्शन भी किए और संबंधित लोगों के खिलाफ शिकायतें दीं.
आंबेडकर के महाड़ आंदोलन का जिक्र
खरगे ने अपने पत्र में डॉ. भीमराव आंबेडकर के महाड़ आंदोलन का भी उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि उस समय भी आंबेडकर के तालाब से पानी पीने के बाद कथित तौर पर गोमूत्र और गोबर से शुद्धीकरण किया गया था. खरगे ने कहा कि यह मामला सिर्फ उनके सम्मान का नहीं, बल्कि उन करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा है जो आज भी जातिगत भेदभाव का सामना करते हैं.
खरगे ने नड्डा से मांग की है कि वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को निर्देश देकर हल्द्वानी की घटना में शामिल लोगों और संगठनों के खिलाफ FIR दर्ज कराना सुनिश्चित करें.
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