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    Home»झारखंड»इंडी अलायंस के लिए चुनावी बॉन्ड का मुद्दा साबित हो सकता है संजीवनी
    झारखंड

    इंडी अलायंस के लिए चुनावी बॉन्ड का मुद्दा साबित हो सकता है संजीवनी

    Team JoharBy Team JoharApril 4, 2024No Comments5 Mins Read0
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    रांची : एक ओर जहां शीर्ष अदालत ने चुनावी बांड पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने चुनावी बांड को असंवैधानिक करार देते हुए इस नीति को रद्द कर दिया है. वहीं दूसरी ओर देश की राजनीति में काले धन का मुद्दा दिलचस्प और गंभीर विषय है, जो न केवल राजनीतिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है, बल्कि लोकतंत्र के मूल्यों को भी खतरे में डालता है.

    काला धन बना चिंता का विषय

    चुनावों में काले धन का इस्तेमाल लंबे समय से भारतीय राजनीति में चिंता का विषय रहा है. यह चुनाव के नतीजे को प्रभावित करने के लिए अघोषित या बेहिसाब धन का उपयोग करने की अवैध प्रथा को संदर्भित करता है. 2017 में, सरकार ने राजनीतिक फंडिंग को अधिक पारदर्शी बनाने के साधन के रूप में चुनावी बांड पेश किया. हालांकि, इन बांडों ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक उपकरण के रूप में उनके संभावित उपयोग पर चिंताएं बढ़ा दी हैं. चुनावी बांड के माध्यम से राजनीतिक दलों को बड़ी मात्रा में धन दान किए जाने की खबरें आई हैं, इन फंडों के स्रोत या उपयोग का कोई खुलासा नहीं किया गया है. इससे राजनीतिक दलों की अपने दानदाताओं और आम जनता के प्रति पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठता है. ऐसे आरोप भी लगे हैं कि इन बांडों का इस्तेमाल चुनावों में काले धन को प्रवाहित करने के लिए किया जा रहा है, जिससे ऐसे फंडों तक पहुंच रखने वाले दलों के पक्ष में परिणाम झुक रहे हैं. इंडी अलायंस को इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाना चाहिए और चुनावी बांड के संभावित दुरुपयोग की ओर ध्यान दिलाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करना चाहिए. यह आंदोलन 1988-89 में फोर्स गन दलाली घोटाले के दौरान विश्वनाथ प्रताप सिंह के प्रयासों के नक्शेकदम पर चल सकता है. भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके अभियान के परिणामस्वरूप राजीव गांधी की सरकार को सत्ता गंवानी पड़ी और भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का मार्ग प्रशस्त हुआ.

    …तो इसलिए बना गठबंधन

    गठबंधन का गठन 2023 में भारतीय राजनीति में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के खिलाफ लड़ने के उद्देश्य से किया गया था. इस गठबंधन में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों सहित 25 दल शामिल हैं. गठबंधन को देश भर में महत्वपूर्ण समर्थन और समर्थन प्राप्त हुआ है, इसके सदस्य 31 मार्च, 2024 को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली के लिए एक साथ आए हैं. गठबंधन ने वर्तमान सरकार के खिलाफ खड़े होकर अपनी ताकत और एकता दिखाई है, वहीं एक महत्वपूर्ण मुद्दे को संबोधित करने की तत्काल आवश्यकता है जो संभावित रूप से आगामी चुनावों को प्रभावित कर सकता है.

    कांग्रेस के लिए संयुक्त मोर्चे की जरूरत

    इंडी अलायंस को कांग्रेस पार्टी के बैंक खातों पर आयकर रोक के मुद्दे का भी समाधान करना चाहिए. आयकर विभाग द्वारा लगाई गई इस रोक ने पार्टी की चुनाव अभियान को वित्तपोषित करने की क्षमता को पंगु बना दिया है और लक्षित राजनीतिक प्रतिशोध का संदेह पैदा कर दिया है. आरंभ में लगा जैसे इससे कांग्रेस पार्टी सहानुभूति प्राप्त कर रही है, लेकिन अभी चुनाव अभियान में बहुत कम समय बचा है. कांग्रेस जो इंडी एलायंस की सबसे बड़ी पार्टनर है. सत्तारूढ़ सरकार की ऐसी कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस के लिए संयुक्त मोर्चे की जरूरत है.

    इंडी अलायंस को मजबूत मुद्दों पर ध्यान देनें की जरूरत

    31 मार्च, 2024 को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली ने इंडी अलायंस की ताकत और एकता का प्रदर्शन किया. हालांकि, यह देखा गया कि अधिकांश फोकस और समर्थन आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं के इर्द-गिर्द घूमता रहा. जहां पार्टी देश भर में 545 सीटों में से 22 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, वहीं गठबंधन में शामिल अन्य दल इससे भी बड़ी संख्या के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो यह संभावना नहीं है कि इंडी अलायंस वर्तमान सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश कर पाएगा. इंडी अलायंस को अपना ध्यान किसी एक पार्टी का समर्थन करने से हटकर उन मुद्दों पर केंद्रित करना चाहिए जो उसके सभी सदस्यों और अंततः पूरे देश को प्रभावित करते हैं.

    काले धन के खिलाफ अभियान हो सकता है गेम-चेंजर

    चुनावी बांड में काले धन के खिलाफ एक प्रमुख अभियान शुरू करना गठबंधन के लिए गेम-चेंजर हो सकता है. यह एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करेगा जो न केवल निष्पक्ष चुनावों को प्रभावित करता है बल्कि लोकतांत्रिक सिद्धांतों को भी कमजोर करता है. अंत में, मौजूदा सरकार के खिलाफ एक मजबूत और प्रभावी विपक्ष के रूप में उभरने के लिए इंडी अलायंस को चुनावी बांड में काले धन के मुद्दे को संबोधित करने को प्राथमिकता देनी चाहिए. इस प्रथा के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू करके और राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता की वकालत करके, गठबंधन न केवल अपने सदस्यों, बल्कि आम जनता से भी समर्थन और विश्वास हासिल कर सकता है.

    इसे भी पढ़ें: धनबाद इंडी गठबंधन में एक अनार सौ बीमार, नहीं हो सका प्रत्याशी का चयन

     

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