Palamu : वर्ल्ड फेम राजहरा कोलियरी से 16 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद शनिवार से फिर कोयला उत्पादन शुरू होने जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे कोलियरी का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। वर्ष 2010 में खदान में पानी भर जाने के बाद राजहरा कोलियरी में उत्पादन बंद हो गया था।
शुक्रवार को पलामू सांसद विष्णुदयाल राम ने राजहरा कोलियरी को लेकर प्रेस कांफ्रेंस कर उत्पादन शुरू होने से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि शनिवार से कोयले का उत्पादन प्रारंभ हो जाएगा। जिन परिवारों ने कोलियरी के लिए दो एकड़ से अधिक भूमि दी है, उन्हें नियमानुसार रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक दो लोगों को नौकरी दी जा चुकी है, जबकि चार अन्य को नियुक्ति देने की प्रक्रिया आखरी चरण में है।
सांसद ने बताया कि राजहरा कोलियरी का कोयला उच्च गुणवत्ता का है, जो जी-9 श्रेणी में आता है। उत्पादन शुरू होने से क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से ही वह कोलियरी से दोबारा उत्पादन शुरू कराने के लिए प्रयासरत थे।
गौरतलब है कि वर्ष 2010 में डीजीएमएस (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी) ने माइनिंग ऑपरेशन बंद करा दिया था। डीजीएमएस की 2015 में जारी रिपोर्ट के अनुसार 15 जून से 31 अक्टूबर तक खनन कार्य पर रोक लगाई गई थी।
4.9 मिलियन टन कोयले का भंडार
राजहरा कोलियरी में लगभग 4.9 मिलियन टन कोयले का भंडार मौजूद है। यहां सामान्य रूप से प्रतिवर्ष 0.30 मिलियन टन, जबकि अधिकतम 0.50 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया जाएगा। कोलियरी की पर्यावरणीय वैधता 2026 तक है, जिसे नवीनीकरण की प्रक्रिया में रखा गया है। वहीं, पर्यावरणीय मंजूरी 2037 तक के लिए मान्य है।
1842 से जुड़ा है राजहरा कोलियरी का इतिहास
राजहरा कोलियरी का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1842 में मेसर्स बंगाल कोल कंपनी लिमिटेड ने यहां सबसे पहले भूमिगत खनन कार्य शुरू किया था। 1969 में इसका स्वामित्व रामसरन दास एंड ब्रदर्स को हस्तांतरित किया गया। 149 वर्षों तक लगातार खनन के बाद 1991 में भूमिगत खनन कार्य बंद कर दिया गया। इसके बाद 1990-91 में राजहरा ओपन कास्ट प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई और वाणिज्यिक कोयला उत्पादन शुरू किया गया था।
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