New Delhi : दिल्ली उच्च न्यायालय अगले सप्ताह 9 मार्च को अहम सुनवाई करेगा। सुनवाई सीबीआई की उस याचिका पर होगी जिसमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को बरी करने वाले राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।
मामला
न्यायमूर्ति स्वर्णकांत शर्मा की एकल पीठ के समक्ष यह मामला सूचीबद्ध है। सीबीआई ने क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन दायर की है और राउज एवेन्यू कोर्ट के उस विस्तृत आदेश पर सवाल उठाया है, जिसमें सभी 23 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने से इनकार कर दिया गया था।
ट्रायल कोर्ट का फैसला
निचली अदालत ने 1,100 से ज्यादा पैराग्राफ वाले आदेश में कहा कि सीबीआई का मामला पूरी तरह विफल और निराधार है। लगभग 300 अभियोजन गवाहों के बयान और विशाल रिकॉर्ड की जांच के बाद भी कोई ठोस सबूत नहीं मिला जो आरोपियों पर संदेह पैदा कर सके। अदालत ने साफ कहा कि बिना वैध सबूत मुकदमा चलाना न्याय के खिलाफ होगा।
शराब नीति और आरोप
यह मामला AAP सरकार की 2021-22 की शराब नीति से जुड़ा है, जिसे भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच रद्द कर दिया गया था।
सीबीआई का दावा था कि नीति को निजी कंपनियों, खासकर ‘साउथ ग्रुप’ को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया था। इसके बदले कथित रूप से चुनावी फंडिंग के लिए रिश्वत ली गई और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
कोर्ट ने साजिश सिद्धांत खारिज किया
निचली अदालत ने सीबीआई की साजिश की थ्योरी को खारिज करते हुए कहा कि नीति नियम और परामर्श के अनुसार वैध रूप से बनाई गई थी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल ने इसे ‘झूठा केस’ बताया और कहा: “सत्यमेव जयते।” मनीष सिसोदिया को कोर्ट के बाहर समर्थकों ने सराहा और खुशी जताई। दूसरी ओर, भाजपा के मनोज तिवारी ने चेतावनी दी कि हाईकोर्ट में सीबीआई की अपील से फैसला पलट सकता है। उन्होंने शराब नीति वापसी और सिम-फोन नष्ट करने जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए।
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