Devghar : देवघर में 51 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर माली का काम करने वाले मोती राम को आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सेवा नियमित करने के आदेश को बरकरार रखा है। साथ ही देवघर मार्केटिंग बोर्ड की अपील खारिज कर दी है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
देवघर के बंपास टाउन निवासी मोती राम की नियुक्ति जून 2001 में देवघर मार्केटिंग बोर्ड में दैनिक वेतनभोगी माली के रूप में हुई थी। प्रशासनिक भवन के पास लगाए गए आम के 10 पौधों की देखभाल के लिए उन्हें रखा गया था। उस समय उनकी मजदूरी सिर्फ 51 रुपये प्रतिदिन तय की गई थी। सालों तक उन्होंने यही काम जारी रखा।
मजदूरी बढ़ाने की मांग
वर्ष 2015 में मोती राम ने अपनी मजदूरी बढ़ाने के लिए आवेदन दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें सिर्फ 4346 रुपये मासिक मिल रहे हैं। इसके बाद तत्कालीन उपायुक्त ने मार्च 2015 में उनका वेतन बढ़ाकर 7593 रुपये प्रतिमाह कर दिया।
नियमितीकरण की लड़ाई
साल 2020 में जिला प्रशासन ने 10 साल या उससे ज्यादा समय से काम कर रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवा नियमित करने को लेकर सूचना जारी की। मोती राम ने भी आवेदन दिया, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। पहले एकलपीठ ने फरवरी 2023 में उनकी याचिका खारिज कर दी। लेकिन मोती राम ने हार नहीं मानी और खंडपीठ में अपील दायर की। खंडपीठ ने माना कि वे 24 साल से लगातार काम कर रहे हैं और नियमितीकरण के लिए आवेदन भी मांगे गए थे। इसके बाद अदालत ने उनकी सेवा नियमित करने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
इस फैसले को चुनौती देते हुए मार्केटिंग बोर्ड सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए बोर्ड की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी। साथ ही हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
24 साल की मेहनत लाई रंग
करीब 24 साल तक लगातार सेवा देने के बाद अब मोती राम की नौकरी नियमित होगी। लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें यह राहत मिली है। यह फैसला उन दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी अहम माना जा रहा है, जो सालों से नियमितीकरण का इंतजार कर रहे हैं।
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