मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस एमडी सुमथी की बेंच ने 7 अक्टूबर को कहा कि धार्मिक परिवर्तन में शामिल किसी संगठन को विदेशी चंदा लेने के लिए फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के तहत पंजीकरण नहीं दिया जा सकता.
कोर्ट ने कहा कि यह नियम किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है. यदि कोई कट्टरपंथी हिंदू संगठन ‘घर वापसी’ के जरिए लोगों का धार्मिक परिवर्तन कराता है, तो उसे भी FCRA पंजीकरण नहीं मिल सकता. अदालत ने यह टिप्पणी कांजेओन पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट (Kanzeon Public Charitable Trust) की याचिका पर सुनवाई करते हुए की.
क्या है पूरा मामला
मामला कोडाइकनाल में जेन मेडिटेशन सेंटर चलाने वाले कांजेओन पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा है. ट्रस्ट ने विदेशी चंदा हासिल करने के लिए FCRA पंजीकरण का आवेदन दिया था. केंद्र सरकार ने उसका आवेदन खारिज कर दिया था. इसके खिलाफ ट्रस्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया. ट्रस्ट का कहना था कि उसकी मुख्य गतिविधि जेन मेडिटेशन है और इसे धार्मिक गतिविधि नहीं माना जाना चाहिए. ट्रस्ट ने तर्क दिया कि जेन भारत की प्राचीन ध्यान परंपरा से जुड़ा है. इसके विपरीत केंद्र सरकार ने माना कि ट्रस्ट की गतिविधियां धार्मिक प्रकृति की हैं.
हाईकोर्ट ने ट्रस्ट की गतिविधियों और उसके संस्थापक की पृष्ठभूमि पर गौर किया. अदालत ने कहा कि जेन बुद्धिज्म महायान बौद्ध परंपरा की एक शाखा है. कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रस्ट को FCRA आवेदन में अपनी धार्मिक प्रकृति स्पष्ट करनी चाहिए थी. अदालत के अनुसार, आवेदन करते समय संस्था को अपनी वास्तविक गतिविधियों के बारे में पूरी जानकारी देनी चाहिए थी.
धार्मिक परिवर्तन से संबंधित FCRA के प्रावधान पर चर्चा करते हुए पीठ ने कहा कि कानून सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होता है. अदालत ने कहा कि अगर कोई कट्टरपंथी हिंदू संगठन ‘घर वापसी’ में शामिल है, तो उसे भी FCRA के तहत पंजीकरण नहीं दिया जा सकता.
अदालत ने कहा कि अगर विदेशी धन का इस्तेमाल धार्मिक परिवर्तन के लिए स्वतंत्र रूप से होने दिया गया, तो इससे देश की संप्रभुता प्रभावित हो सकती है. कोर्ट ने इसी संदर्भ में कुछ ईसाई संस्थाओं की ओर से धार्मिक परिवर्तन की गतिविधियों का भी उल्लेख किया. हालांकि, पीठ ने स्पष्ट किया कि वह कांजेओन ट्रस्ट पर लोगों का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप नहीं लगा रही है.
हिंदू धर्म को समावेशी, अब्राहमिक धर्मों को विशिष्ट बताया
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने हिंदू और अब्राहमिक धर्मों की प्रकृति को लेकर भी टिप्पणी की. बेंच ने कहा, “हिंदू धर्म समावेशी है, जबकि अब्राहमिक धर्म स्वभाव से विशिष्ट हैं.”
अदालत ने कहा कि धर्मनिष्ठ यहूदी, ईसाई और मुस्लिम अपने धर्म को “एकमात्र सच्चा और पूर्ण रहस्योद्घाटन” मानते हैं. अदालत ने भारत को एक बहुलतावादी देश बताते हुए कहा कि देश का यह स्वरूप तब प्रभावित हो सकता है, जब कोई एक धार्मिक समूह दूसरे पर वर्चस्व हासिल कर ले.
फैसले में एक दलील का भी उल्लेख किया गया कि मसीहाई धर्म कभी-कभी स्थानीय और देशज परंपराओं के प्रतीकों को अपनाकर आगे चलकर धर्म परिवर्तन के लिए जमीन तैयार करते हैं. हालांकि, अदालत ने कहा कि इस दावे की सच्चाई पर फैसला करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और ऐसी बहस दूसरे मंचों पर होनी चाहिए.
अदालत ने ट्रस्ट के संस्थापक और उसके प्रमुख व्यक्ति रेव. फादर अमा सामी एसजे (Rev. Fr. Ama Samy SJ) की पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया. कोर्ट के अनुसार, वह एक ऑर्डिन्ड ईसाई पादरी हैं. ट्रस्ट ने खुद को गैर-धार्मिक संस्था के तौर पर पेश किया था. इस पर अदालत ने कहा कि जेन बुद्धिज्म महायान बौद्ध परंपरा से जुड़ा है और ट्रस्ट को अपनी धार्मिक प्रकृति छिपाने के बजाय FCRA आवेदन में उसे स्पष्ट करना चाहिए था.
विदेशी चंदा लेना मौलिक अधिकार नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि विदेशी योगदान प्राप्त करना किसी संस्था का पूर्ण या निहित मौलिक अधिकार नहीं है. अदालत के अनुसार, विदेशी चंदा प्राप्त करना अधिक से अधिक एक कानूनी विशेषाधिकार माना जा सकता है.
बेंच ने यह भी कहा कि FCRA के तहत पंजीकरण के लिए आवेदन करने वाली संस्था की गतिविधियों को उनकी वास्तविक प्रकृति के आधार पर देखा जाना चाहिए. केवल संस्था के अपने दावे के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि उसकी गतिविधियां धार्मिक हैं या नहीं.
फैसले में अदालत ने धार्मिक गतिविधियों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े शैक्षणिक कार्य के बीच अंतर भी किया. पीठ ने कहा कि वेदांत, भगवद्गीता, उपनिषद, योग और इससे जुड़े भारतीय ज्ञान विषयों को पढ़ाने वाली संस्थाओं को सामान्य तौर पर शैक्षणिक या सांस्कृतिक संस्था माना जा सकता है, न कि केवल धार्मिक संस्था. अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार के FCRA पंजीकरण खारिज करने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और कांजेओन पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की अपील खारिज कर दी.

