Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Home»जोहार ब्रेकिंग»दुर्गा भाभी: भगत सिंह को अंग्रेजों की नजर से बचाकर लाहौर से निकालने वाली क्रांतिकारी महिला की कहानी
    जोहार ब्रेकिंग

    दुर्गा भाभी: भगत सिंह को अंग्रेजों की नजर से बचाकर लाहौर से निकालने वाली क्रांतिकारी महिला की कहानी

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkOctober 7, 2026No Comments5 Mins Read3
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    “मैं जन्म से क्रांतिकारी नहीं थी, बल्कि विचारों की परिपक्वता के साथ क्रांतिकारी बनी. एक व्यक्ति जितना सोचता, समझता, पढ़ता और लिखता है, उसके विचार बदलते हैं और मजबूत होते जाते हैं. शुरुआत भावनात्मक होती है, लेकिन आगे चलकर विचार उसे वास्तविक क्रांतिकारी बनाते हैं.”

    दुर्गावती देवी ने यह बात 16 फरवरी 1972 को लखनऊ में दिए एक मौखिक इतिहास साक्षात्कार में कही थी. एस.एल. मनचंदा ने यह बातचीत नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी के ओरल हिस्ट्री प्रोजेक्ट के लिए रिकॉर्ड की थी. करीब छह दशक पहले जिस महिला ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भूमिगत क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लिया था, वह इस बातचीत में अपने उस सफर को याद कर रही थीं.

    दुर्गावती देवी को क्रांतिकारी आंदोलन में दुर्गा भाभी के नाम से जाना गया. उनका जन्म 7 अक्टूबर 1907 को हुआ था. इतिहास में उनका नाम सबसे ज्यादा उस घटना के लिए दर्ज है, जब साल 1928 में सॉन्डर्स की हत्या के बाद पुलिस भगत सिंह को तलाश रही थी. सॉन्डर्स ब्रिटिश पुलिस अधिकारी थे, जिसकी 17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह, राजगुरु और उनके साथियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. क्रांतिकारियों ने दरअसल लाला लाजपत राय की मौत का का बदला लेने के लिए पुलिस अधिकारी जेम्स स्कॉट को निशाना बनाया था, लेकिन पहचान की गलती के कारण सॉन्डर्स मारे गाए. इसके बाद दुर्गा देवी ने अपनी पहचान और सामाजिक स्थिति का जोखिम उठाकर उन्हें लाहौर से बाहर निकलने में मदद की.

    लेकिन यह उनकी कहानी का सिर्फ एक हिस्सा था. वह हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के क्रांतिकारी नेटवर्क से जुड़ी थीं और बाद में खुद भी ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ सशस्त्र कार्रवाई में शामिल हुईं.

    सॉन्डर्स की हत्या के बाद भगत सिंह को लाहौर से निकाला

    दुर्गावती देवी का विवाह कम उम्र में भगवती चरण वोहरा से हुआ था. भगवती चरण वोहरा आगे चलकर HSRA के प्रमुख क्रांतिकारियों और विचारकों में शामिल हुए. लाहौर में रहते हुए दुर्गा देवी का संपर्क भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और दूसरे क्रांतिकारियों से हुआ.

    दिन 17 दिसंबर 1928 को लाहौर में पुलिस अधिकारी जॉन पी. सॉन्डर्स की हत्या के बाद ब्रिटिश पुलिस ने क्रांतिकारियों की तलाश तेज कर दी. भगत सिंह के लिए लाहौर से निकलना जरूरी था. उन्होंने अपना हुलिया बदल लिया. बाल कटवाए, दाढ़ी-मूंछ साफ की और पश्चिमी कपड़े पहन लिए.
    इसके बाद भगत सिंह को एक सामान्य परिवार के सदस्य के रूप में बाहर निकालने की योजना बनी. दुर्गा देवी ने उनकी पत्नी होने का भेष अपनाया. उनका छोटा बेटा भी साथ था और राजगुरु नौकर के रूप में उनके साथ चले.

    वे रेलवे स्टेशन पहुंचे और ट्रेन से लाहौर से बाहर निकल गए. यह यात्रा लखनऊ तक हुई, जहां से आगे वे कलकत्ता की ओर गए. इस पूरी योजना में दुर्गा देवी की मौजूदगी महत्वपूर्ण थी, क्योंकि एक महिला और बच्चे के साथ यात्रा कर रहे युवक पर पुलिस को तुरंत भगत सिंह होने का शक नहीं हुआ.
    यह घटना उन्हें ‘दुर्गा भाभी’ के रूप में प्रसिद्ध करने वाली सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो गई. हालांकि उनका योगदान केवल भगत सिंह को सुरक्षित बाहर निकालने तक सीमित नहीं था.

    वह क्रांतिकारियों को आश्रय देने, संदेश और संसाधन पहुंचाने तथा संगठन के लिए धन जुटाने जैसे कामों में भी शामिल थीं. भारत सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने क्रांतिकारियों की मदद के लिए अपने आभूषण तक बेच दिए थे.

    पति की मौत के बाद खुद उठाया क्रांतिकारी रास्ता

    दुर्गा भाभी के पति भगवती चरण वोहरा भगत सिंह और उनके साथियों को जेल से छुड़ाने की योजनाओं से जुड़े थे. दिन 28 मई 1930 को रावी नदी के किनारे बम का परीक्षण करते समय उनकी मौत हो गई.

    पति की मौत के बाद दुर्गा देवी ने क्रांतिकारी गतिविधियों से दूरी नहीं बनाई. बल्कि 1972 के अपने मौखिक इतिहास में उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने चंद्रशेखर आजाद से अपने हिस्से का पूरा क्रांतिकारी काम करने की मांग की थी. इसी दौर में उनका जीवन और अधिक जोखिम भरा हो गया. वह भूमिगत रहीं और ब्रिटिश पुलिस से बचते हुए क्रांतिकारी नेटवर्क में सक्रिय रहीं.

    साल 1930 में मुंबई के लैमिंगटन रोड पर हुई गोलीबारी की एक घटना में भी दुर्गा देवी की भूमिका का उल्लेख इतिहासकार कामा मैक्लीन के शोध में मिलता है. इस कार्रवाई में एक ब्रिटिश पुलिस अधिकारी और उसकी पत्नी घायल हुए थे. इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि वह केवल क्रांतिकारियों की मदद करने वाली महिला नहीं थीं, बल्कि खुद भी सशस्त्र क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल थीं.

    दिन 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दिए जाने के बाद भी क्रांतिकारी गतिविधियों पर ब्रिटिश कार्रवाई जारी रही. दुर्गा देवी भी पुलिस की निगरानी और गिरफ्तारी के खतरे में रहीं. बाद के वर्षों में उनका जीवन बदल गया. क्रांतिकारी गतिविधियों से अलग होने के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काम किया और लखनऊ में बच्चों के लिए स्कूल शुरू किया. दुर्गावती देवी का निधन 15 अक्टूबर 1999 को हुआ.

    Also Read : विनोद खन्ना: कभी अमिताभ से होती थी तुलना, फिर क्यों छोड़ दिया था करोड़ों का स्टारडम ? जानें उनके बारे में दिलचस्प बातें

    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous Articleक्या है ‘भूतिया कण’? जिसकी खोज पर फ्रांसिस हाल्जेन को मिला नोबेल पुरस्कार
    Next Article 25 साल की सत्ता यात्रा पर PM मोदी बोले- ‘मैं एंबीशन नहीं, मिशन के लिए जीने वाला इंसान हूं’, कहा- जिसने गिराया उसी ने खड़ा होना सिखाया

    Related Posts

    आदिवासी

    अंतिम आदिवासी भाग-5: सर पर 33 किलो राशन और ढ़ाई घंटे का सफर, बरसात में दो महीने लॉकडाउन, 18 साल से नियुक्ति पत्र लिए घूम रहे आदिम जनजाति बिरिजिया के लोग

    October 8, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    राफेल से तेजस तक: 94 साल में कैसे बदली भारतीय वायुसेना, अब ड्रोन और मिसाइलों के दौर में नई चुनौती

    October 8, 2026
    खेल-सिनेमा

    नाना पाटेकर का निधन: 13 साल की उम्र में फिल्म पोस्टर बनाने से लेकर सिनेमा के दिग्गज बनने तक का सफर

    October 8, 2026
    आदिवासी

    दुर्गा पूजा के दौरान 60 साल पहले हुई थी शिबू सोरेन से मुलाकात, वहीं तय हुई थी शादी, जानिये रूपी सोरेन के बारे में अनकही कहानी

    October 7, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    Breaking : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माँ रूपी सोरेन का देहांत

    October 7, 2026
    क्राइम

    Johar Live Exclusive : CGL परीक्षा पेपर लीक केस, SIT की जांच में हुआ खुलासा: दुर्गापुर में भी 36 छात्रों को रटाए गए थे प्रश्नों के उत्तर

    October 7, 2026
    Latest Posts

    अंतिम आदिवासी भाग-5: सर पर 33 किलो राशन और ढ़ाई घंटे का सफर, बरसात में दो महीने लॉकडाउन, 18 साल से नियुक्ति पत्र लिए घूम रहे आदिम जनजाति बिरिजिया के लोग

    October 8, 2026

    राफेल से तेजस तक: 94 साल में कैसे बदली भारतीय वायुसेना, अब ड्रोन और मिसाइलों के दौर में नई चुनौती

    October 8, 2026

    नाना पाटेकर के निधन पर PM मोदी की श्रद्धांजलि, कहा – उनके निभाए किरदार पीढ़ियों तक याद किए जाएंगे.

    October 8, 2026

    नाना पाटेकर का निधन: 13 साल की उम्र में फिल्म पोस्टर बनाने से लेकर सिनेमा के दिग्गज बनने तक का सफर

    October 8, 2026

    रूपी सोरेन के निधन पर राहुल गांधी से रघुबर दास तक ने जताया शोक, संघर्ष के दिनों में साथ देने को किया याद

    October 7, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.