वर्तमान समय में सोने की कीमत आसमान की ऊंचाइयों को छू रही है, जिससे आम आदमी के लिए सोना खरीदना मुश्किल हो गया है. लेकिन हैरानी की बात है कि सोना महंगा होने के बाद भी भारत में ज्वेलरी के कारोबार में गिरावट नहीं आई है.
अनुमान के मुताबिक, देश का ज्वेलरी बाजार करीब 7 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच चुका है. जनवरी 2026 में इंडिया ब्रांड इक्विटी फाउंडेशन (IBEF) के मुताबिक जेम्स एंड ज्वेलरी बाजार करीब 7.31 लाख करोड़ का था. (आईबीईएफ भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce & Industry) के तहत काम करने वाली संस्था है. इसका काम भारत और भारतीय उद्योगों की ब्रांडिंग, निवेश और व्यापार से जुड़ी जानकारी को बढ़ावा देना है.)
लेकिन यहां कहानी थोड़ी अलग है. लोग सोना पहले के मुकाबले कम वजन में खरीद रहे हैं, लेकिन उस पर खर्च होने वाली रकम ज्यादा है. यानी बाजार अब सिर्फ इस बात से नहीं बढ़ रहा कि कितने ग्राम सोना बिका, बल्कि इस बात से भी बढ़ रहा है कि उस सोने की ज्वेलरी की कीमत कितनी है और उसका डिजाइन कैसा है.
कम सोना, लेकिन ज्यादा पैसा खर्च
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़े इस बदलाव को साफ दिखाते हैं. साल 2026 की पहली छमाही में भारत में ज्वेलरी की मांग वजन के हिसाब से 17.1 फीसदी कम हुई. लेकिन इसी दौरान ज्वेलरी पर खर्च की गई रकम 40 फीसदी बढ़कर करीब 2.13 लाख करोड़ हो गई. सिर्फ अप्रैल से जून 2026 के बीच ज्वेलरी की मांग करीब 15.4 फीसदी घटकर 75.1 टन रह गई, लेकिन इसकी कीमत यानी कुल खर्च 34.4 फीसदी बढ़कर 1.13 लाख करोड़ पहुंच गया.
सीधी भाषा में समझें तो आमतौर पर पहले कोई ग्राहक 20 ग्राम की ज्वेलरी खरीदता था, अब शायद 12-15 ग्राम की खरीद रहा है. लेकिन सोने का भाव ज्यादा होने की वजह से उसका बिल फिर भी बड़ा हो सकता है. यही बदलाव पूरे ज्वेलरी कारोबार की तस्वीर बदल रहा है.
पुराने सोने से नई ज्वेलरी
महंगे सोने के दौर में ग्राहक के लिए एक और रास्ता खुला है—पुराना सोना देकर नया गहना लेना. यानी घर में रखी पुरानी अंगूठी, चेन, कंगन या दूसरी ज्वेलरी लेकर ग्राहक ज्वेलर के पास जाता है और उसे एक्सचेंज करके नया डिजाइन खरीद लेता है. इसका फायदा ग्राहक और ज्वेलर दोनों को होता है. ग्राहक को पूरा नया सोना खरीदने के लिए उतने पैसे नहीं लगाने पड़ते और ज्वेलर को बाजार से नया सोना खरीदने की जरूरत कम पड़ती है. इस ट्रेंड का बड़ा उदाहरण कल्याण ज्वेलर्स है.
कंपनी के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में उसके रेवेन्यू में 46 फीसदी से ज्यादा हिस्सा रिसाइकल्ड गोल्ड (recycled gold) यानी पुराने सोने से आया. जून महीने में यह हिस्सा 55 फीसदी से भी ज्यादा रहा. यानी ग्राहक का पुराना सोना अब सिर्फ घर की तिजोरी में पड़ा हुआ सामान नहीं है, बल्कि ज्वेलरी कारोबार की सप्लाई का एक बड़ा स्रोत भी बन रहा है.
भारी गहनों की जगह हल्की और डिजाइन वाली ज्वेलरी
महंगा सोना ग्राहक की पसंद भी बदल रहा है. पहले शादी या खास मौकों पर भारी सोने के गहने खरीदने का चलन ज्यादा था. अब खासकर युवा ग्राहक हल्के वजन, रोज पहनने लायक और ट्रेंडी डिजाइन वाली ज्वेलरी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं. कम कैरेट के विकल्प और स्टडेड ज्वेलरी भी इस बदलाव का हिस्सा हैं.
इस बदलाव का फायदा बड़े ज्वेलरी ब्रांड्स को भी मिल रहा है. टाइटन (Titan) के ज्वेलरी कारोबार में अप्रैल-जून 2026 तिमाही में 43 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई और ज्वेलरी नेटवर्क बढ़कर 1,227 स्टोर्स तक पहुंच गया. कंपनी ने तिमाही के दौरान 33 नए ज्वेलरी स्टोर जोड़े.
कल्याण ज्वेलर्स ने भी जून तिमाही में 10,589 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही से करीब 46 फीसदी ज्यादा है. कंपनी के भारत कारोबार में रेवेन्यू ग्रोथ करीब 38 फीसदी रही. यह आंकड़े बताते हैं कि महंगा सोना ज्वेलरी की मांग को पूरी तरह खत्म नहीं कर रहा. बल्कि ग्राहक और ज्वेलर दोनों खरीदारी का तरीका बदल रहे हैं.

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