चाय की केतली से लेकर मिठाई की दुकान तक… इस वक्त बाजार में चीनी गरम है. कुछ ही दिनों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं. कई जगह खुदरा कीमत 60 रुपये किलो के पार पहुंच गई है. वहीं थोक बाजार में भी चीनी के भाव रिकॉर्ड स्तर पर हैं. अब सवाल है कि क्या देश में सचमुच चीनी की कमी हो रही है या जमाखोरी और त्योहारों की बढ़ती मांग ने कीमतों को चढ़ाया है?
चीनी के दाम क्यों बढ़े?
चीनी को लेकर बाजार में इस समय चिंता बनी हुई है. मौजूदा चीनी सीजन खत्म होने की ओर है और नई फसल आने में अभी समय है. ऊपर से गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहार आने वाले हैं, जिससे चीनी की मांग बढ़ने की उम्मीद है.
बॉम्बे शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन (BSMA) के अनुसार, महाराष्ट्र के कोल्हापुर में चीनी की थोक कीमत अगस्त की शुरुआत से करीब 20 फीसदी बढ़कर ₹5,350 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है. कुछ बाजारों में खुदरा कीमत ₹62 से ₹65 किलो तक बताई जा रही है. रांची की बात करें तो खुदरा बाजार में 65 रु. प्रति किलो बिक रही है. जबकि थोक मंडी में चीनी की कीमत 6150 प्रति क्वींटल तक पहुंच गई है.
सरकार का दावा – चीनी की कमी नहीं
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कहना है कि देश में घरेलू खपत के लिए पर्याप्त चीनी है. सरकार के मुताबिक मौजूदा तेजी सिर्फ मांग-सप्लाई का मामला नहीं है. जमाखोरी, सट्टेबाजी और पेपर ट्रेडिंग ने भी कीमतों को बढ़ाया है. इसी वजह से सरकार (केंद्र सरकार द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन) ने पहले 1 अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी डीलरों पर स्टॉक लिमिट लगाई गई है.
पहले कदम के बावजूद कीमतें बढ़ीं तो सरकार ने अब बड़े खरीदारों के लिए स्टॉक लिमिट और घटा दी है. सितंबर से 30 नवंबर तक महीने में 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी खरीदने वाले बल्क कंज्यूमर्स सिर्फ 15 दिन का स्टॉक रख सकेंगे. मकसद है कि बड़ी मात्रा में चीनी गोदामों में रोककर न रखी जाए और बाजार में सप्लाई बनी रहे.
इंडियन शुगर एवं बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार सरकार अब करीब 10 लाख टन कच्ची चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने पर भी विचार कर रही है. इसके अलावा करीब 3 लाख टन रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में उतारने का विकल्प भी देखा जा रहा है. हालांकि, 20 अगस्त तक आयात पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
एथेनॉल भी कहानी का हिस्सा
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार गन्ने के एक हिस्से का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में होता है. बाजार में चिंता है कि इससे चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ने पर दबाव पड़ सकता है. सरकार ज्यादा गन्ने को चीनी उत्पादन की तरफ मोड़ने के विकल्प पर भी विचार कर रही है.
फिलहाल चीनी के दाम कम नहीं हुए हैं. पंद्रह दिन वाली नई स्टॉक लिमिट 1 सितंबर से लागू होगी. अगर इससे बाजार में अतिरिक्त स्टॉक आता है तो कीमतों पर दबाव कम हो सकता है. लेकिन अगर असली समस्या सप्लाई की है, तो सिर्फ जमाखोरी रोकना काफी नहीं होगा. ऐसे में विदेश से चीनी आयात करना सरकार का ज्यादा असरदार कदम साबित हो सकता है.
यानी अभी तस्वीर साफ है, बाजार सप्लाई की कमी की बात कर रहा है, सरकार जमाखोरी को बड़ी वजह मान रही है और दोनों के बीच सरकार कीमतों को काबू में करने के लिए स्टॉक लिमिट से लेकर आयात तक के विकल्प आजमा रही है.
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