Patna : भारत-नेपाल सीमा पर नियम अचानक सख्त कर दिए गए हैं। अब त्रिवेणी बॉर्डर से नेपाल जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना स्वास्थ्य जांच के प्रवेश नहीं मिलेगा। गंडकी प्रदेश सरकार ने संक्रामक बीमारियों को रोकने के लिए यह फैसला लिया है। नए नियम के मुताबिक, भारत से नेपाल जाने वाले सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी गई है। खास तौर पर उन लोगों पर ज्यादा नजर रखी जा रही है, जो नेपाल के अंदर 6 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय करने वाले हैं।
यात्रियों की जांच के लिए त्रिवेणी नाका पर एक स्थायी हेल्थ डेस्क बनाया जा रहा है। यहां स्वास्थ्य कर्मी सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक तैनात रहेंगे। जांच के दौरान यात्रियों से पूछताछ के साथ जरूरत पड़ने पर खून के सैंपल भी लिए जा सकते हैं। इस व्यवस्था का मकसद मलेरिया, डेंगू, एचआईवी (HIV) और अन्य संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोकना है। अधिकारियों का मानना है कि सीमा पर सख्ती बढ़ाने से बीमारियों के फैलाव पर नियंत्रण किया जा सकेगा।
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार ने बजट भी जारी किया है। नवलपरासी जिला स्वास्थ्य कार्यालय के अनुसार, हेल्थ सहायता केंद्र के लिए 5 लाख रुपये और भवन निर्माण के लिए 6 लाख रुपये दिए गए हैं। यह सख्ती सिर्फ त्रिवेणी बॉर्डर तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से सटे सोनौली बॉर्डर और महाराजगंज के ठूठीबारी बॉर्डर पर भी जांच के सख्त निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में इस व्यवस्था को और मजबूत और आधुनिक बनाया जाएगा। अब नेपाल जाने वाले हर यात्री को इस अनिवार्य जांच से गुजरना ही होगा, तभी उसे आगे जाने की अनुमति मिलेगी।
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