Kolkata : पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच शुक्रवार की सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक अलग ही रूप देखने को मिला। कोलकाता के व्यस्त चुनावी कार्यक्रमों के बीच पीएम मोदी ने अलसुबह हुगली नदी के तट पर शांति के कुछ पल बिताए। राजभवन (लोकभवन) में रात्रि विश्राम के बाद, प्रधानमंत्री हुगली के तट पर पहुंचे, जहां उन्होंने न केवल मां गंगा के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की, बल्कि हाथ में कैमरा थामकर सुबह के मनमोहक दृश्यों और जनजीवन को अपने लेंस में कैद किया।
गंगा और बंगाल की आत्मा पर साझा की भावनाएं
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’पर अपनी नौका विहार की तस्वीरें साझा करते हुए बंगाल की संस्कृति और गंगा के साथ उसके अटूट रिश्ते को रेखांकित किया। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए लिखा, “हर बंगाली के लिए गंगा का स्थान अत्यंत विशेष है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि गंगा बंगाल की आत्मा में बहती है।” पीएम मोदी ने कहा कि मां गंगा का पावन जल एक पूरी सभ्यता की कालातीत भावना को अपने भीतर संजोए हुए है। नौका पर सवार शांत चित्त मुद्रा में हाथ में कैमरा लिए प्रधानमंत्री की ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
For every Bengali, the Ganga occupies a very special place. One can say that the Ganga flows through the soul of Bengal. Her divine waters carry the timeless spirit of an entire civilisation.
This morning in Kolkata, I spent some time on the banks of the Hooghly river, an… pic.twitter.com/I3Y0gsFl3E
— Narendra Modi (@narendramodi) April 24, 2026
स्थानीय लोगों और नाविकों से की मुलाकात
हुगली के तट पर बिताए गए इस समय के दौरान, प्रधानमंत्री ने केवल प्रकृति का आनंद ही नहीं लिया, बल्कि वहां मौजूद स्थानीय नाविकों और सुबह की सैर पर निकले आम नागरिकों से भी मुलाकात की। उन्होंने नाविकों के कठिन परिश्रम की मुक्त कंठ से सराहना की और उनके कर्मठ स्वभाव को प्रेरणादायक बताया।

चुनावी माहौल में संदेश
यह यात्रा केवल आध्यात्मिक नहीं थी, बल्कि इसमें राजनीतिक और सामाजिक प्रतिबद्धता का भी गहरा संदेश छिपा था। एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री ने नदिया और दक्षिण 24 परगना में विशाल जनसभाओं को संबोधित किया था और बेलूर मठ में आध्यात्मिक शांति प्राप्त की थी। हुगली की लहरों के बीच से पीएम मोदी ने एक बार फिर बंगाल के चहुंमुखी विकास और यहां के गौरवशाली लोगों की समृद्धि के लिए निरंतर काम करने के अपने संकल्प को दोहराया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह कदम बंगाल की जनता के साथ सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव को और अधिक प्रगाढ़ करने की एक सोची-समझी कोशिश है।
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