Patna : सफर के बीच ऐसा पल आया जिसे देख हर यात्री भावुक हो गया। 13287 अप साउथ बिहार एक्सप्रेस अपने तय रूट पर दौड़ रही थी। कोच एस-1 में रायपुर से पटना जा रही खुशबू नाम की महिला अपने दो छोटे बच्चों के साथ सफर कर रही थीं। लंबा रास्ता था, लेकिन किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह यात्रा उनके लिए जिंदगी का सबसे खास पल बन जाएगी।
अचानक बढ़ी तकलीफ, कोच में मची हलचल
रास्ते में अचानक खुशबू को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। शुरुआत में सहयात्रियों को लगा कि शायद तबीयत बिगड़ गई है, लेकिन कुछ ही मिनटों में हालात गंभीर हो गए। कोच में अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया।
यात्रियों ने तुरंत हिम्मत दिखाई। किसी ने पानी दिया, किसी ने पर्दा करके थोड़ी निजता बनाई। साथ ही रेलवे स्टाफ को सूचना दे दी गई। ट्रेन तब तक झाझा स्टेशन के करीब पहुंच चुकी थी और खबर जीआरपी स्कॉर्ट पार्टी तक भी पहुंच गई थी।
ट्रेन रुकते ही हरकत में आई टीम
जैसे ही ट्रेन झाझा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर रुकी, आरपीएफ झाझा के एसआईपीएफ अशोक कुमार अपनी टीम के साथ सीधे एस-1 कोच में पहुंचे। लेकिन तब तक एक बड़ी खुशखबरी सामने आ चुकी थी। महिला ने कोच के अंदर ही एक बच्ची को जन्म दे दिया था। टीम ने बिना वक्त गंवाए हालात संभाले। यात्रियों की मदद से मां और नवजात को सुरक्षित रखा गया।
कोच में ही प्राथमिक इलाज, फिर अस्पताल रवाना
सूचना मिलते ही रेलवे के डॉक्टर भी मौके पर पहुंच गए। कोच के अंदर ही मां और बच्ची को प्राथमिक उपचार दिया गया। जांच के बाद डॉक्टरों ने सलाह दी कि बेहतर देखभाल के लिए अस्पताल ले जाना जरूरी है।
रेलवे प्रशासन ने फौरन एंबुलेंस मंगवाई। मां और नवजात को झाझा रेफरल अस्पताल भेजा गया। सुरक्षा के लिहाज से जीआरपी की एक महिला आरक्षी भी उनके साथ गईं, ताकि रास्ते में किसी तरह की दिक्कत न हो।
अस्पताल से आई राहत की खबर
झाझा रेफरल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. मो. शादाब ने बताया कि जीआरपी से सूचना मिलते ही मेडिकल टीम तैयार कर ली गई थी। अस्पताल पहुंचते ही दोनों की जांच की गई। अच्छी बात यह रही कि मां और बच्ची दोनों पूरी तरह स्वस्थ पाई गईं।
डॉक्टर ने यह भी बताया कि खुशबू अपने दो छोटे बच्चों के साथ अकेले सफर कर रही थीं। उनके साथ कोई पुरुष सदस्य नहीं था। ऐसे में ट्रेन में मौजूद यात्रियों और रेलवे टीम की तत्परता ने बड़ी जिम्मेदारी निभाई।
तालमेल और संवेदनशीलता की मिसाल
पूरे घटनाक्रम में आरपीएफ और जीआरपी के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। समय पर सूचना, फौरन कार्रवाई और मानवीय संवेदनशीलता ने एक मुश्किल घड़ी को खुशियों में बदल दिया।
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