Johar Live Desk : भारत में सदियों से घर की पहली रोटी गाय को खिलाने की परंपरा चली आ रही है। इसे केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि करुणा और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है। आज के वैज्ञानिक दौर में भी यह परंपरा उपयोगी साबित हो रही है। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि जब गायों को सड़क का कचरा खाने के बजाय घर की बनी सादी रोटी और हरा चारा मिलता है, तो उनकी सेहत बेहतर रहती है। इससे उनका पाचन तंत्र मजबूत होता है, दूध की गुणवत्ता बढ़ती है और बीमारियों का खतरा कम होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गाय जुगाली करने वाली पशु है और उसे रेशेदार, साफ भोजन की जरूरत होती है। सादी गेहूं की रोटी उनके लिए फायदेमंद है, जबकि नमक, तेल या प्लास्टिक में दिया गया खाना नुकसान पहुंचा सकता है। गाय को सही ढंग से भोजन देने से पर्यावरण को भी लाभ होता है। भरपेट खाना मिलने पर गाय कचरे में मुंह नहीं डालतीं, जिससे प्लास्टिक खाने से होने वाली बीमारियां कम होती हैं। स्वस्थ गाय का गोबर जैविक खाद और ईंधन के रूप में भी उपयोगी होता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि गाय को बिना नमक-तेल की सादी रोटी दें, सड़क किनारे खिलाने से बचें और संभव हो तो गौशालाओं में रोटी या चारा दान करें। इस तरह, गाय को पहली रोटी देना न केवल एक परंपरा है, बल्कि विज्ञान, पर्यावरण और पशु कल्याण से जुड़ा एक सकारात्मक कदम भी है।
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