असुंता लकड़ा की शिकायत के मामले में नया मोड़ आ गया है. ताजा अपडेट के मुताबिक पूरे मामले में खेल मंत्रालय ने सीधा दखल दिया है. मंत्रालय ने जांच का आदेश दिया है और कहा है कि पूरे मामले की जांच पॉश अधिनियम के तहत किया जाए.
खेल मंत्रालय ने हॉकी इंडिया को पत्र लिखकर भारत की पूर्व कप्तान असुंता लकड़ा द्वारा लगाये गए धमकी और उत्पीड़न के आरोपों की जांच के निर्देश देते हुए उसका नतीजा मंत्रालय के साथ साझा करने को कहा है.
लकड़ा ने हॉकी में यौन उत्पीड़न के आरोपियों को बचाने, महिला खिलाड़ियों के साथ दुव्यर्वहार और धमकाने के आरोप लगाते हुए खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर तुरंत दखल का अनुरोध किया था. उन्होंने हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह पर उन्हें धमकाने का आरोप लगाया था.
सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने हॉकी इंडिया अध्यक्ष दिलीप टिर्की को लिखे पत्र में कहा, ‘‘ भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और हॉकी इंडिया के कार्यकारी बोर्ड की सदस्य असुंता लकड़ा द्वारा 10 जुलाई को मंत्रालय को भेजे गये ईमेल में यौन उत्पीड़न, संस्थागत तौर पर धमकी और महिला खिलाड़ियों से जुड़े मसलों की निष्पक्ष जांच का अनुरोध किया था.’’
पूर्व कोच गोला के खिलाफ दर्ज कराई थी शिकायत
इसमें आगे कहा गया, ‘‘ आपसे अनुरोध है कि असुंता लकड़ा द्वारा उठाये गए मसलों को उचित कार्रवाई के लिये महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (पॉश अधिनियम) के तहत गठित हॉकी इंडिया की आंतरिक शिकायत समिति के सामने रखा जाये. साथ ही जांच के नतीजे को मंत्रालय के साथ साझा किया जाये.’’ हालांकि जांच की हालांकि कोई समय सीमा तय नहीं की गई है.
असुंता ने रांची में एकलव्य हॉकी अकादमी में महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न के आरोपी कोच सुधीर गोला के खिलाफ आवाज उठाई थी. गोला को बाद में बर्खास्त कर दिया गया था. असुंता ने गोला के खिलाफ आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए यह भी कहा था कि यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाये ताकि किसी महिला खिलाड़ी भविष्य में ऐसा करने से पहले सोचना नहीं पड़े.
हालांकि असुंता के आरोपों पर हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह कहा था कि सब आगामी चुनावों के मद्देनजर किया जा रहा है. उन पर लगे सभी आरोप गलत हैं. उन्होंने यह भी बताया था कि जब खिलाड़ियों ने गोला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, तब झारखंड सरकार ने उन्हें तत्काल कोच के पद से हटा दिया था. यहां तक कि हॉकी इंडिया ने भी उन्हें अपने किसी भी सेंटर के कोच पर नहीं रखा था.

