New Delhi : संसद में विपक्ष के हंगामे के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘विकसित भारत जी-राम-जी विधेयक’ पर सरकार की ओर से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार का पक्ष सुनना ही नहीं चाहता और लगातार कार्यवाही में बाधा डाल रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्होंने देर रात तक विपक्षी सांसदों की बातें सुनीं, लेकिन जब सरकार का जवाब देने का समय आया तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया। कृषि मंत्री ने कहा कि अपनी बात कहकर जवाब न सुनना भी एक तरह की हिंसा है।
उन्होंने सरकार की ओर से जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय फंड का दुरुपयोग हुआ, जबकि वर्तमान सरकार ने विकास कार्यों और जनकल्याण पर खर्च को प्राथमिकता दी है। उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक किसानों और गरीबों के हित में लाया गया है, फिर भी इसका विरोध किया जा रहा है।
गांधी के आदर्शों पर चलने का दावा
कृषि मंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी गांधी जी के सामाजिक और आर्थिक विचारों को मानती है। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने गांवों को भारत की आत्मा बताया था और यह विधेयक गांवों के विकास के लिए है।
भेदभाव के आरोपों को किया खारिज
विपक्ष द्वारा लगाए गए भेदभाव के आरोपों पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं करती। उन्होंने कहा कि देश का हर हिस्सा सरकार के लिए समान है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कथन का भी उल्लेख किया।
कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर जवाब देते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार पर किसी तरह की सनक सवार नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने सरकारी योजनाओं और संस्थानों का नामकरण केवल नेहरू परिवार के नाम पर किया। उन्होंने दावा किया कि कई योजनाएं, संस्थान, सड़कें और पुरस्कार इसी परिवार के नाम पर रखे गए।
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