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    Home»जोहार ब्रेकिंग»आम नागरिक बीजेपी मुर्दाबाद और अमित शाह मुर्दाबाद जैसे नारे क्यों नहीं लगा सकते : जस्टिस माधव जामदार की टिप्पणी चर्चा में
    जोहार ब्रेकिंग

    आम नागरिक बीजेपी मुर्दाबाद और अमित शाह मुर्दाबाद जैसे नारे क्यों नहीं लगा सकते : जस्टिस माधव जामदार की टिप्पणी चर्चा में

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyJuly 3, 2026No Comments3 Mins Read
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    मुस्कान चौधरी 

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कहा है कि सिर्फ सरकार के फैसलों का विरोध करने की वजह से किसी नागरिक को राज्य या शहर से बाहर नहीं निकाला जा सकता. कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस की ओर से सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी के खिलाफ जारी एक्सटर्नमेंट ऑर्डर रद्द कर दिया.

    सुनवाई के दौरान जस्टिस माधव जामदार ने महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीति और सरकार के रवैये पर कई तीखी मौखिक टिप्पणियां भी कीं. उन्होंने कहा कि पूरे महाराष्ट्र में “हॉर्स ट्रेडिंग” यानी दलबदल का खेल चल रहा है और इशारों में सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक “वॉशिंग मशीन” भी है, जहां जाने के बाद नेताओं के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले खत्म हो जाते हैं.

    SDPI के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वाहिद चौधरी ने केंद्र सरकार और भाजपा की नीतियों के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित किए थे. इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने उनके खिलाफ एक्सटर्नमेंट ऑर्डर जारी कर दिया. इस आदेश के तहत उन्हें एक साल के लिए शहर से बाहर रहने का निर्देश दिया गया था.

    यह आदेश 3 दिसंबर 2025 को डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (जोन-6) ने जारी किया था, जिसे बाद में 27 मार्च 2026 को कोंकण डिवीजन के डिविजनल कमिश्नर ने भी बरकरार रखा. सईद ने इसी आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.

    जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि किसी सरकार की नीतियों का विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है. सिर्फ विरोध प्रदर्शन करने के आधार पर किसी नागरिक के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं की जा सकती. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता ने अपनी राजनीतिक हैसियत से सरकार के कुछ फैसलों का विरोध किया था. यह महाराष्ट्र पुलिस एक्ट के तहत किसी व्यक्ति को शहर से बाहर निकालने का आधार नहीं बन सकता.

    अदालत ने माना कि यह कार्रवाई गलत नीयत से की गई थी. कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 हर नागरिक को अपनी बात रखने और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देते हैं. सरकार के फैसलों का विरोध करने पर कार्रवाई करना इन मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

    सुनवाई के दौरान जज की तीखी टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र की राजनीति पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा कि आजकल विधायक और सांसद लगातार पार्टियां बदल रहे हैं और पूरे राज्य में “हॉर्स ट्रेडिंग” चल रही है. उन्होंने हल्के अंदाज में याचिकाकर्ता से कहा, “आप भी पाला बदल लीजिए. आपके खिलाफ कुछ एफआईआर हैं. एक ‘वॉशिंग मशीन’ है, वहां चले जाइए.”

    उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में एक 10 साल के बच्चे की सड़क हादसे में मौत हो गई, लेकिन विधानसभा में उस मुद्दे की बजाय इस बात पर चर्चा हो रही थी कि पीठासीन अधिकारी कैसे एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में चले गए. सुनवाई के दौरान जस्टिस जामदार ने यह भी कहा कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए. उन्होंने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें नागरिकों को भारत सरकार का “गुलाम” बनाया जा रहा है.

    सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने सईद अहमद चौधरी के खिलाफ जारी एक्सटर्नमेंट ऑर्डर रद्द कर दिया. अदालत ने कहा कि सरकार की आलोचना करना या विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे अपराध की तरह नहीं देखा जा सकता. इसी के साथ कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया.

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