झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब 17 अगस्त के उस बड़े फैसले तक पहुंच चुका है, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं, उनके रिजल्ट और इन परीक्षाओं के माध्यम से हुए चयन को रद्द करने का ऐलान किया. साथ ही JPSC और JSSC की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी बनाने की घोषणा की गई. सरकार ने 2014 के बाद हुई नियुक्तियों की जांच की बात भी कही है.
लेकिन यह फैसला अचानक नहीं आया. इसकी एक महत्वपूर्ण कड़ी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम पहुंची गुमनाम शिकायत से जुड़ती है. शिकायत में JPSC की परीक्षाओं के संचालन और परीक्षा से जुड़े काम के आवंटन में कथित अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई थी. इसके बाद सरकारी स्तर पर जांच शुरू हुई, CID की एंट्री हुई, FIR दर्ज हुई, गिरफ्तारियां हुईं और फिर जांच का दायरा JPSC से आगे बढ़कर परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL और JSSC तक पहुंचता चला गया.
2 जुलाई: 14वीं JPSC के रिजल्ट के बाद उठे सवाल
14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट 2 जुलाई को जारी हुआ. कुल 2,204 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किए गए. रिजल्ट के साथ ही परीक्षा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे.
कैटेगरीवार कटऑफ सार्वजनिक नहीं किए जाने और सोशल मीडिया पर सामने आई एक OMR शीट को लेकर विवाद खड़ा हुआ. दावा किया गया कि संबंधित अभ्यर्थी ने केवल 48 प्रश्न भरे थे, इसके बावजूद उसका चयन हुआ. रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे.
मामला राजनीतिक स्तर तक पहुंचा और डुमरी विधायक जयराम महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जांच की मांग की.
गुमनाम शिकायत पहुंची मुख्यमंत्री तक
इसी पूरे घटनाक्रम की दूसरी महत्वपूर्ण कड़ी मुख्यमंत्री के नाम भेजी गई गुमनाम शिकायत थी. शिकायत में JPSC की प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन और परीक्षा संबंधी काम के आवंटन में कथित गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई थी.

सरकार ने शिकायत को गंभीरता से लिया. 21 जुलाई को गृह विभाग के अवर सचिव दयानंद कुमार ने CID के ADG मनोज कौशिक को पत्र भेजकर मामले की जांच और रिपोर्ट देने का निर्देश दिया.
इसके बाद CID ADG ने DSP वेंकटेश कुमार को जांच की जिम्मेदारी सौंपी. DSP ने 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक जांच पूरी कर रिपोर्ट CID ADG को सौंप दी. इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर 22 जुलाई को CID थाना में FIR दर्ज की गई.
FIR में TDPL के निदेशक सत्यपाल सिंह और रामवीर सिंह, कंपनी के कर्मचारियों मोहम्मद उस्मान और अवध, JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता तथा JPSC के कर्मचारियों मनोज तिर्की, सोनू कुमार और अभय कुमार तिवारी को नामजद किया गया. अज्ञात कर्मचारियों और अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया.
FIR में आरोप लगाया गया कि मिलीभगत के जरिए एक दागी कंपनी को परीक्षा से जुड़े गोपनीय और संवेदनशील कार्य दिए गए तथा गोपनीय दस्तावेजों को कार्यालय से बाहर भेजा गया.

20 जुलाई: JPSC मुख्यालय में CID की छापेमारी
जांच के बीच 20 जुलाई को CID ने JPSC कार्यालय में छापेमारी की और तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया.
इसी दिन देर शाम JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. 21 जुलाई को राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया.
इसके बाद मामला और तेजी से आगे बढ़ा.
22 जुलाई: नौ परीक्षाएं स्थगित
22 जुलाई को JPSC ने 25 जुलाई से 29 सितंबर के बीच प्रस्तावित नौ परीक्षाएं स्थगित कर दीं. इनमें JPSC मुख्य परीक्षा के अलावा सिविल जज और सहायक लोक अभियोजक जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं शामिल थीं.
यह पहला बड़ा संकेत था कि मामला केवल 14वीं JPSC के रिजल्ट तक सीमित नहीं रहने वाला है. परीक्षा संचालन की पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ चुकी थी.
23 जुलाई: जांच का दायरा बढ़ा
23 जुलाई को सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी. इसके बाद JPSC मुख्यालय, TDPL के कार्यालय और पूर्व अध्यक्ष के सरकारी आवास समेत कई ठिकानों पर छापेमारी हुई.
जांच में उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत कई लोगों की गिरफ्तारी हुई. बाद की कार्रवाई में TDPL के निदेशकों और कर्मचारियों के साथ JPSC से जुड़े लोगों, कथित बिचौलियों और कुछ अभ्यर्थियों तक जांच पहुंची.
इसी दौरान जांच की एक अहम कड़ी के रूप में अभय कुमार तिवारी का नाम सामने आया.
अभय तिवारी की गिरफ्तारी ने खोलीं कई परतें
JPSC भर्ती घोटाले की जांच में अभय कुमार तिवारी की गिरफ्तारी बड़ा मोड़ साबित हुई. TDPL के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर रहे अभय तिवारी को CID ने गिरफ्तार किया. जांच में उसके पुराने TDPL कनेक्शन को महत्वपूर्ण माना गया.
गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ में परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों, कथित लेनदेन और अभ्यर्थियों को कथित तौर पर लाभ पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर कई जानकारियां सामने आईं. उसके कथित बयानों ने जांच को केवल JPSC के प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहने दिया.
जांच में सामने आए कथित बयानों के आधार पर JSSC-CGL की कथित पेपर लीक, JPSC की अलग-अलग परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को पास कराने और परीक्षा प्रक्रिया में कथित सेटिंग के आरोपों की कड़ियां भी सामने आने लगीं.
यहीं से जांच में परीक्षा कराने वाली एजेंसी, आयोग के पदाधिकारियों और अभ्यर्थियों के बीच कथित सांठगांठ का एंगल और मजबूत हुआ.
बाद की पूछताछ और जांच में सामने आए बयानों के आधार पर 11वीं-13वीं JPSC, 14वीं JPSC, ACF/FRO और JSSC-CGL समेत अलग-अलग परीक्षाओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आए.
28 जुलाई-1 अगस्त: ख्यांगते से लंबी पूछताछ
28 जुलाई से 1 अगस्त के बीच पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते से करीब 32 घंटे पूछताछ की गई. जांच के दौरान उनसे TDPL को काम देने, परीक्षा संचालन और कथित लेनदेन से जुड़े सवाल पूछे गए.
बाद में ख्यांगते की गिरफ्तारी हुई. इसके साथ जांच में JPSC के शीर्ष स्तर तक कथित सांठगांठ की जांच तेज हुई.
TDPL कनेक्शन ने बदल दिया जांच का स्वरूप
जांच आगे बढ़ी तो TDPL की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक बनकर सामने आई.
पड़ताल के दौरान सामने आए एक कथित बयान के अनुसार, TDPL को JPSC का काम दिलाने के लिए तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते के साथ 2 करोड़ रुपये और कंपनी की कुल बिलिंग का 20 प्रतिशत कमीशन तय होने का आरोप सामने आया.
आरोप के मुताबिक TDPL को OTR, OMR स्कैनिंग, OSM, एडमिट कार्ड और अटेंडेंस शीट जैसे परीक्षा संबंधी काम दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी और जून 2025 में कंपनी को JPSC की परीक्षाओं से संबंधित एग्रीमेंट तथा वर्क ऑर्डर मिला.
यह पूरा हिस्सा जांच में सामने आए कथित बयान और उपलब्ध साक्ष्यों पर आधारित है. इसकी अंतिम न्यायिक पुष्टि अभी बाकी है.
7-8 अगस्त: सरकार और छात्रों के बीच बातचीत
जांच के साथ छात्र आंदोलन भी तेज होता गया. 7 अगस्त को छात्रों ने मार्च निकाला और सरकार की ओर से गठित मंत्रिमंडलीय समूह से बातचीत हुई. 8 अगस्त को दूसरे छात्र गुट के प्रतिनिधियों ने भी मंत्रियों से मुलाकात की.
छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, विवादित परीक्षाओं पर कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार शामिल था.
इसके बाद आंदोलन और सरकार के बीच बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा, लेकिन समाधान नहीं निकला. 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान छात्र आंदोलन और सरकार के बीच टकराव ने राजनीतिक दबाव और बढ़ा दिया. विधानसभा का मानसून सत्र भी JPSC मुद्दे पर हंगामे के बीच निर्धारित समय से एक दिन पहले समाप्त हो गया.
9-14 अगस्त: जांच से सामने आए नए आरोप
अगस्त के दूसरे सप्ताह में जांच से जुड़े कई गंभीर आरोप सामने आए. इनमें JPSC की अलग-अलग परीक्षाओं में अभ्यर्थियों से कथित तौर पर पैसे लेकर पास कराने, इंटरव्यू में कथित सेटिंग और JSSC-CGL पेपर लीक से जुड़े आरोप शामिल थे.
JSSC-CGL को लेकर सामने आए आरोपों में पेपर लीक और अभ्यर्थियों को पहले से प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराने की बात कही गई. वहीं JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और अन्य परीक्षाओं में कथित सेटिंग को लेकर भी जांच आगे बढ़ी.
11 अगस्त के आसपास मामला और राजनीतिक रूप से गरमाया. सरकार की ओर से तीन JPSC परीक्षाओं को रद्द करने, JSSC-CGL की उच्चस्तरीय जांच और TDPL से जुड़े मामले की जांच आगे बढ़ाने की बात सामने आई.
16 अगस्त: आंदोलन निर्णायक मोड़ पर
16 अगस्त तक छात्र आंदोलन अपने 23वें दिन में पहुंच चुका था. इसी दिन चार और छात्र भूख हड़ताल पर बैठे. दूसरी तरफ सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच अगले दौर की बातचीत के लिए 17 अगस्त की तारीख तय हुई.
इस बीच जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी जारी रही और JPSC से जुड़े पुराने अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में बनी रही.
17 अगस्त: फैसले से पहले CM की मंत्रियों के साथ बैठक
17 अगस्त की सुबह छात्रों से वार्ता से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंत्रियों के साथ बैठक की. बैठक में JPSC-JSSC आंदोलन और सरकार के अगले कदम पर मंथन हुआ. उसी दिन CID की कार्रवाई भी जारी रही.
JPSC सदस्य अजीता भट्टाचार्य के PA ब्रज कुमार राम की गिरफ्तारी हुई. वहीं पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते से CID की पूछताछ करीब 48 घंटे तक चलने की जानकारी सामने आई.
यानी छात्रों से बातचीत से पहले सरकार के सामने एक तरफ आंदोलन का दबाव था, तो दूसरी तरफ जांच में लगातार सामने आ रहे तथ्य और गिरफ्तारियों का सिलसिला.
17 अगस्त: हेमंत सोरेन का सबसे बड़ा फैसला
इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वह फैसला लिया जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी.
उन्होंने घोषणा की कि JPSC और JSSC में सुधार के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाएगी.
साथ ही सरकार ने फैसला लिया कि:
– TDPL के माध्यम से आयोजित परीक्षाएं रद्द की जाएंगी.
– TDPL द्वारा प्रकाशित परिणाम रद्द किए जाएंगे.
– TDPL के माध्यम से जिन अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, उनका चयन रद्द किया जाएगा.
– 2014 के बाद हुई नियुक्तियों की जांच की जाएगी.
यानी सरकार ने कार्रवाई का दायरा परीक्षा से रिजल्ट और रिजल्ट से चयन तक बढ़ा दिया.
गुमनाम शिकायत से शुरू हुई यह कहानी अब JPSC-JSSC की पूरी परीक्षा व्यवस्था में सुधार के फैसले तक पहुंच चुकी है. जुलाई में जहां सवाल एक परीक्षा के रिजल्ट और परीक्षा संचालन को लेकर उठे थे, वहीं अगस्त के मध्य तक जांच का दायरा कथित परीक्षा गड़बड़ी, एजेंसी की भूमिका, नियुक्तियों और चयन प्रक्रिया तक फैल गया.
अब आगे की नजर इस बात पर होगी कि TDPL के जरिए आयोजित कितनी परीक्षाएं और कितने चयन इस फैसले की जद में आते हैं, 2014 के बाद हुई नियुक्तियों की जांच किस दायरे में होगी और अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली कमेटी JPSC-JSSC की परीक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव सुझाती है.


