मुस्कान चौधरी
एक समस्या, एक शिकायत और इसके समाधान के बीच जो गैप होता है, वो कई बार सालों तो कभी दशकों का इंतजार होता है. जिलों के अधिकारियों से आम जनता यही उम्मीद मात्र करती है कि वो उन तक पहुंचे और समाधान लेकर मुस्कुराते हुए लौटे. अक्सर आम जनता की यह उम्मीद नाकामियों, नाउम्मीदी और थका देने वाला होता है.
लेकिन थोड़ा ठहरिये. परिस्थिति बदलती है. लोग उम्मीद से भरते हैं. सिमडेगा में फिलहाल ऐसा ही कुछ होता दिख रही है. जिलाधिकारी कंचन सिंह ने सबसे पहले तो जनता दरबार को नियमित किया. जब यहां परिणाम अपेक्षित मिले, जनता दरबार को जिला मुख्यालय से बाहर प्रखंड व गांव तक पहुंचाया.
परिणाम ये हुआ कि हर गुरुवार को आयोजित होने वाला जनता दरबार अब केवल शिकायत सुनने का मंच नहीं, बल्कि आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान का भरोसेमंद माध्यम बनता जा रहा है. हाल के दिनों में देखा जाए तो कई सालों और महीनों से विभाग की चक्कर लगा रहे पीड़ितों को उपायुक्त के जनता दरबार से तत्काल राहत मिल रही है.
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 23 जनता दरबारों के दौरान कुल 444 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 207 मामलों का सफल निष्पादन किया गया. वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 22 जनता दरबारों में 513 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें 115 मामलों का निष्पादन किया जा चुका है. जबकि शेष मामलों पर विभागीय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई जारी है. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जनता दरबार केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समस्याओं के समाधान की प्रभावी व्यवस्था बन चुका है.
उपायुक्त कंचन सिंह ने दिव्यांगजन, वृद्ध एवं अशक्त महिलाओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए जनता दरबार का आयोजन समाहरणालय के भूतल पर सुनिश्चित कराया, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े. कई मामलों में दिव्यांगजन की समस्याएं सुनने के तुरंत बाद उन्हें दिव्यांग प्रमाण-पत्र, दिव्यांग पेंशन, व्हीलचेयर, इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल, मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल सहित सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ मौके पर ही उपलब्ध कराया गया. इससे जरूरतमंदों को कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिली.

जब जिला मुख्यालय से बाहर निकला जनता दरबार
सिमडेगा जैसे भौगोलिक परिस्थिति वाले इलाकों में सुदूर गांवों से जिला मुख्यालय तक पहुंचना भी आम जन के लिए दुरूह होता है. कई बार यह एक दिन की मजदूरी खोने से लेकर सप्ताह तक की कमाई को होल्ड पर रखने जैसा होता है. ऐसे में प्रतिदिन कमा कर खानेवालों के लिए कई बार अपनी समस्याओं में रहना ही बेहतर विकल्प होता है.
जिलाधिकारी कंचन सिंह बतौर महिला शायद इस परिस्थिति को बेहतर समझ पाई. उन्होंने जनता दरबार को ही जनता के बीच पहुंचा दिया. कंचन सिंह बताती हैं, बानो और बांसजोर जैसे सुदूरवर्ती प्रखंड के लोगों के लिए जिला मुख्यालय पहुंचना कठिन होता है. मैंने इन जगहों पर जाकर जनता दरबार लगाने का प्रयास किया. ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं. प्रत्येक मंगलवार को प्रखंड सह अंचल कार्यालयों में भी प्रखंड विकास पदाधिकारी के द्वारा जनता दरबार आयोजित किए जाने की व्यवस्था लागू करवाई. जिससे दूर-दराज के ग्रामीणों को जिला मुख्यालय आने की आवश्यकता कम हुई.
जनता दरबार में भूमि विवाद, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, प्रधानमंत्री आवास, पेयजल, स्वास्थ्य, राजस्व, प्रमाण-पत्र, सड़क और अन्य विकास कार्यों से संबंधित बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए. विशेष रूप से सड़क निर्माण और जर्जर सड़कों की मरम्मत से जुड़े मामलों में उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारी से स्थलों का निरीक्षण कराया तथा आवश्यकतानुसार संबंधित विभागों को प्रस्ताव एवं पत्र भेजकर सड़क स्वीकृति की मांग भी की है. भूमि विवाद जैसे मामलों के शीघ्र निष्पादन के लिए अंचल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए.
कंचन सिंह कहती हैं, जनता दरबार में प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी आयोजित होती है. प्रत्येक आवेदन की प्रगति की निगरानी कर लंबित मामलों के शीघ्र समाधान के निर्देश दिए जाते हैं, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों मजबूत हुई हैं.
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