Motihari : बिहार के मोतिहारी जिले के कैथवलिया स्थित विराट रामायण मंदिर में शनिवार को विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित किया गया। इस मौके पर वाराणसी और अयोध्या से आए पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना कराई। । स्थापना के दौरान मंदिर परिसर हर-हर महादेव के नारों से गूंज उठा। इस ऐतिहासिक मौके पर सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा भी मंदिर पहुंचे। पूजा में महावीर मंदिर न्यास बोर्ड के सचिव सायन कुणाल और उनकी सांसद पत्नी शांभवी शामिल हुईं। बता दें कि ग्रेनाइट से बने इस शिवलिंग का वजन करीब 210 टन है।
देशभर से पहुंचे साधु-संत और श्रद्धालु
शिवलिंग की स्थापना को देखने के लिए देशभर से साधु-संत और हजारों श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में मेले जैसा माहौल रहा। पूजा सामग्री और फूलों की कई दुकानें सजी दिखीं। सुरक्षा को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। पूजा शनिवार सुबह 8 बजे से 11 बजे तक चली। इसके बाद हवन हुआ और फिर शिवलिंग की स्थापना की गई। महावीर मंदिर, अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, गुजरात, हरिद्वार और महाराष्ट्र से आए पंडितों ने पूजा कराई।
पवित्र नदियों के जल से हुआ अभिषेक
शिवलिंग के अभिषेक के लिए कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, यमुनोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, गंगासागर, सोनपुर और रामेश्वरम से जल मंगाया गया। इसके अलावा सिंधु, नर्मदा, कावेरी, नारायणी और गंडक नदी के जल से भी अभिषेक किया गया। पूजा के लिए कंबोडिया और कोलकाता से फूल मंगाए गए। शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए 18 फीट लंबी विशेष माला तैयार की गई, जिसमें फूलों के साथ भांग, धतूरा और बेलपत्र शामिल थे।
विशेष तकनीक से हुई स्थापना
शिवलिंग की स्थापना के लिए राजस्थान और भोपाल से 750 टन क्षमता की दो क्रेन मंगाई गई थीं। स्थापना से पहले ट्रायल भी किया गया। पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) द्वारा की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 4 एलईडी स्क्रीन लगाई गईं, जिन पर लाइव प्रसारण दिखाया गया।
आज ही क्यों हुआ शिवलिंग का स्थापना
17 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्दशी तिथि थी। मान्यता है कि इसी दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी। इस दिन का महत्व महाशिवरात्रि के समान माना जाता है, इसलिए शिवलिंग की स्थापना के लिए यह दिन चुना गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीराम विवाह के बाद जनकपुर से अयोध्या इसी मार्ग से गए थे और उसी रास्ते पर भगवान शिव विराजमान होंगे। इसका उल्लेख अरेराज महात्म्य और गरुड़ पुराण में भी मिलता है।
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