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    Home»झारखंड»दुर्गाबाड़ी में सिंदूर खेला की परंपरा बनी सांस्कृतिक एकता की मिसाल
    झारखंड

    दुर्गाबाड़ी में सिंदूर खेला की परंपरा बनी सांस्कृतिक एकता की मिसाल

    Team JoharBy Team JoharOctober 2, 2025No Comments2 Mins Read3
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    दुर्गाबाड़ी
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    Ranchi : रांची की ऐतिहासिक दुर्गाबाड़ी में हर साल की तरह इस बार भी विजयादशमी के मौके पर पारंपरिक सिंदूर खेला का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया। दशकों से चली आ रही इस परंपरा में सुहागिन महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सौभाग्य की कामना की।

    हर साल दुर्गाबाड़ी में दुर्गा पूजा का आयोजन पूरे नियम और अनुशासन के साथ किया जाता है। यह पूजा सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी बन चुकी है।

    बदलते समय के साथ जुड़ते लोग

    पहले यह परंपरा केवल बंगाली समुदाय तक सीमित थी, लेकिन अब शहर के अन्य समुदाय की महिलाएं भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। महिलाएं पारंपरिक लाल साड़ी और बड़ी बिंदी के साथ पूजा में शामिल होती हैं और मां दुर्गा से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लेती हैं।

    सिंदूर खेला का महत्व

    माना जाता है कि यह रस्म विवाहित महिलाओं के लिए सौभाग्य लेकर आती है और उनके परिवार में खुशहाली बनी रहती है। पूरे आयोजन के दौरान दुर्गाबाड़ी परिसर मां की जयकारों और सिंदूर से सराबोर नजर आता है।

    एक महिला श्रद्धालु ने कहा, “यह सिर्फ एक परंपरा नहीं, मां दुर्गा से जुड़ने का माध्यम है। यहां हम आशीर्वाद लेते हैं और एक-दूसरे के जीवन में खुशियां बांटते हैं।”

    दुर्गाबाड़ी का यह आयोजन अब सिर्फ बंगाली समाज का उत्सव नहीं रहा, बल्कि यह रांची की साझा संस्कृति का हिस्सा बन गया है। विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की विदाई भले ही आंखें नम कर जाती है, लेकिन सिंदूर खेला की रौनक हर चेहरे पर मुस्कान बिखेर देती है।

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