New Delhi: भारत के साथ तनाव और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मिली करारी शिकस्त के बाद पाकिस्तान एक नए विवाद में फंसता नजर आ रहा है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने एक सनसनीखेज दावा किया है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को जानबूझकर निशाना बनाया था। TTP का कहना है कि पाकिस्तानी सेना भारत से तो जीत नहीं पाई, लिहाजा अपनी गिरती साख बचाने और घरेलू जनता के बीच अपनी सैन्य कामयाबी का झूठा प्रदर्शन करने के लिए उसने अफगानिस्तान के साथ युद्ध जैसा माहौल बना दिया।
भारत के सामने लाचार और अफगानिस्तान पर प्रहार
TTP की मैगजीन ‘Mujallah Taliban’ के 11वें अंक में प्रकाशित रिपोर्ट ने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व, विशेषकर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के मंसूबों की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत के हाथों मिली हार और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती ताकत के बाद पाकिस्तान का मनोबल पूरी तरह टूट चुका था। टीटीपी का दावा है कि आसिम मुनीर ने अपनी छवि सुधारने के लिए अफगानिस्तान को एक ‘आसान लक्ष्य’ चुना। उन्होंने महसूस किया कि भारत के साथ टकराव में हारने के बाद अपनी सेना की पकड़ और साख बनाए रखने के लिए अफगानिस्तान पर हमला करना ही एकमात्र रास्ता बचा है।
अमेरिका को खुश करने की कूटनीति
TTP ने केवल भारत का ही जिक्र नहीं किया, बल्कि पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व की पुरानी आदत यानी अमेरिका के साथ मिलीभगत पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 में पाकिस्तानी सेना द्वारा अफगान शहरों में किए गए हवाई हमले असल में उग्रवाद खत्म करने के लिए नहीं थे, बल्कि वे केवल अमेरिका को खुश करने और उसकी चिंताओं को दूर करने की एक सोची-समझी कूटनीतिक चाल थी।
‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ और जमीनी हकीकत
फरवरी 2026 में जब पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन गजब-लिल-हक’ के तहत अफगानिस्तान में हमले शुरू किए, तो उसने इसे ‘बिना उकसावे की गोलीबारी का जवाब’ करार दिया था। पाकिस्तान ने इसे ‘खुली जंग’ का नाम दिया, लेकिन TTP की यह रिपोर्ट बताती है कि यह सब महज एक दिखावा था। 2,611 किलोमीटर लंबी ‘डूरंड रेखा’ पर जारी यह तनाव असल में पाकिस्तान के अंदर पनप रहे उस असंतोष को दबाने की कोशिश है जो भारत से मिली हार के बाद पैदा हुआ था।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ का डर अभी भी कायम
यह पूरा विवाद अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले से जुड़ा है, जिसमें 26 सैलानियों की जान गई थी। इसके जवाब में भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु जल संधि को रोकने और 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का आगाज करने का निर्णय लिया था। भारतीय सेना की इस कार्रवाई में सीमा पार आतंकियों के ठिकाने पूरी तरह तबाह कर दिए गए थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी हाल ही में दोहराया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी खत्म नहीं हुआ है।
TTP का यह खुलासा पाकिस्तान की दोहरी नीति को बेनकाब करता है। एक तरफ जहाँ भारत की सख्त सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान को बैकफुट पर धकेल चुकी है, वहीं दूसरी तरफ अपनी साख बचाने की कोशिश में पाकिस्तान अब अफगानिस्तान के साथ एक ऐसे युद्ध में उलझ गया है, जो उसके लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मुसीबतें खड़ी कर सकता है।
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