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    Home»खेल-सिनेमा»एशियन गेम्स मैराथनः कौन है वो सेना का जवान, जिसने 44 साल बाद दिलाया भारत को पदक
    खेल-सिनेमा

    एशियन गेम्स मैराथनः कौन है वो सेना का जवान, जिसने 44 साल बाद दिलाया भारत को पदक

    Riya SinghBy Riya SinghSeptember 26, 2026Updated:September 26, 2026No Comments4 Mins Read4
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    एशियन गेम्स
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    रिया सिंह

    भारतीय मैराथन के इतिहास में 26 सितंबर की तारीख हमेशा याद रखी जाएगी. भारतीय सेना के जवान सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 की पुरुष मैराथन में रजत पदक जीतकर 44 साल से चले आ रहे पदक के सूखे को खत्म कर दिया. इससे पहले भारत ने साल 1982 मैराथन की दौड़ में होसुर कुक्कप्पा सीतारन ने कांस्य पदक जीता था.

    सावन ने 2 घंटे 11 मिनट 36 सेकंड में मैराथन की दौड़ पूरी की और इसी के साथ अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़ दिया. उन्होंने इससे पहले 12 अप्रैल 2026 को रॉटरडैम मैराथन में उन्होंने 2:11:58 का समय निकालकर शिवनाथ सिंह का 48 साल पुराना 2:12:00 का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था.

    कौन हैं सावन बरवाल?

    सावन बरवाल हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित जोगिंदर नगर के पास राडाभंकर गांव के रहने वाले हैं. 28 वर्षीय सावन भारतीय सेना में हवलदार हैं और सेना की इंजीनियरिंग कोर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. सेना में शामिल होने के बाद उन्होंने लंबी दूरी की दौड़ की ट्रेनिंग शुरू की और धीरे-धीरे ट्रैक इवेंट्स में अपनी पहचान बनाई.हालांकि सावन शुरुआत से मैराथन धावक नहीं थे. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 5000 मीटर, 10,000 मीटर और हाफ-मैराथन जैसी प्रतियोगिताओं से की. राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे लंबी दूरी की सड़क दौड़ की तरफ कदम बढ़ाया

    सावन का करियर कैसे शुरू हुआ

    सावन बरवाल शुरुआत से ही मैराथन धावक नहीं थे. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ट्रैक इवेंट्स से की थी. भारतीय सेना में शामिल होने के बाद उन्होंने वहीं से लंबी दूरी की दौड़ की ट्रेनिंग शुरू की.

    साल 2022 से उनके कोच अजित मार्कोस उनके साथ जुड़े, जिन्होंने रिलायंस फाउंडेशन के लॉन्ग-डिस्टेंस प्रोग्राम के तहत उनकी ट्रेनिंग संभाली. सावन ने पहले 5000 मीटर, 10,000 मीटर और हाफ-मैराथन में अपनी पहचान बनाई और राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते.

    अप्रैल 2025 में फेडरेशन कप में उन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में 28:57.13 का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता. इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने 2007 से चला आ रहा 18 साल पुराना मीट रिकॉर्ड भी तोड़ दिया.

    इसके बाद कोच की सलाह पर सावन ने पूरी मैराथन यानी 42.195 किलोमीटर की दौड़ में उतरने का फैसला किया. यानी सावन का पहला बड़ा रिकॉर्ड ट्रैक पर 10,000 मीटर में बना था. इसके बाद उन्होंने सड़क दौड़ और फिर मैराथन की ओर रुख किया.

    पहली मैराथन में ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड

    सावन की पहली प्रतिस्पर्धी फुल मैराथन 12 अप्रैल 2026 को रॉटरडैम मैराथन थी. पहली ही कोशिश में उन्होंने भारतीय मैराथन में बड़ा रिकॉर्ड बना दिया. उन्होंने 2:11:58 का समय निकालकर शिवनाथ सिंह का 1978 से चला आ रहा 48 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया. इस प्रदर्शन के साथ वह 2:12 से कम समय निकालने वाले पहले भारतीय बने और एशियन गेम्स के क्वालिफिकेशन मार्क 2:15:04 को भी पार कर लिया.

    यह रेस सावन के लिए आसान नहीं थी. आखिरी 20 मीटर में वह दो बार लड़खड़ाए और लगभग बेहोशी की हालत में पहुंच गए, लेकिन किसी तरह खुद को संभालते हुए फिनिश लाइन पार की. रेस के बाद उन्हें मेडिकल सहायता के लिए ले जाया गया.

    रॉटरडैम में उनका यह प्रदर्शन रिलायंस फाउंडेशन के “प्रोजेक्ट 2:09” का हिस्सा था. यह पहल भारतीय धावकों को 2 घंटे 10 मिनट की बाधा तोड़ने की दिशा में तैयार करने के उद्देश्य से शुरू की गई है. इसके महज कुछ महीनों बाद सावन ने एशियन गेम्स में अपने ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड को एक बार फिर बेहतर कर दिया और 2:11:36 के समय के साथ रजत पदक जीत लिया.

    सावन शुरू से ही आगे की टोली में बने रहे. आधी दूरी पर वह दूसरे स्थान पर थे. आखिरी कुछ किलोमीटर में यामाशिता ने बढ़त बना ली, लेकिन सावन ने अपनी दूसरी पोजीशन मजबूती से बनाए रखी और रजत पक्का किया. चीन के पेइयू फेंग ने 2:12:13 के समय के साथ कांस्य जीता.

    44 साल बाद लौटा मैराथन पदक

    भारत को मैराथन में यह चौथा एशियन गेम्स पदक है. पूरी लिस्ट कुछ इस तरह है:

    सालखिलाड़ीपदकसमय
    1951छोटा सिंहस्वर्ण2:42:58.6
    1951सुरत सिंह माथुरकांस्य2:53:49.8
    1982होसुर कुक्कप्पा सीतारनकांस्य2:25:07
    2026सावन बरवालरजत2:11:36

    एक दिलचस्प बात यह भी है कि भारत के पहले तीनों पदक घरेलू मैदान (नई दिल्ली) पर जीते गए थे. सावन पहले भारतीय पुरुष हैं जिन्होंने विदेशी धरती पर एशियन गेम्स मैराथन का पदक जीता है.

    ट्रैक इवेंट्स से शुरू हुआ सावन का सफर अब भारतीय मैराथन के इतिहास में दर्ज हो चुका है. सेना के जवान से राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी और अब एशियन गेम्स पदक विजेता बने सावन बरवाल की कहानी भारतीय लंबी दूरी की दौड़ में एक नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखी जा रही है.

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