New Delhi : पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच चल रहा टकराव अब और खतरनाक होता नजर आ रहा है। युद्ध के 17वें दिन गाजा में इजरायली हवाई हमले में कम से कम 13 फिलिस्तीनी मारे गए। मरने वालों में दो बच्चे, एक गर्भवती महिला और 9 पुलिसकर्मी शामिल बताए जा रहे हैं। दूसरी तरफ ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका और इजरायल से जुड़े ठिकानों पर अपने सबसे घातक हथियारों में से एक सेजिल-2 मिसाइल दागी है। इस बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजार पर भी दिखने लगा है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
गाजा में घर और पुलिस वाहन पर हमला
रिपोर्ट के मुताबिक गाजा के मध्य इलाके नुसेरत शरणार्थी शिविर में रविवार को एक घर पर हमला हुआ। इस हमले में एक दंपति, उनका 10 साल का बेटा और पड़ोस का 15 साल का लड़का मारे गए। अस्पताल सूत्रों के अनुसार महिला जुड़वा बच्चों से गर्भवती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि हमला इतना अचानक हुआ कि लोग नींद से उठ भी नहीं पाए और पहले से कोई चेतावनी भी नहीं दी गई थी। इसी दिन गाजा के मध्य इलाके अज-जवायदा के पास एक पुलिस वाहन को निशाना बनाया गया। इस हमले में 9 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। गाजा के आंतरिक मंत्रालय के अनुसार ये पुलिसकर्मी रमजान के दौरान बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे थे। फिलहाल इन हमलों को लेकर इजरायली सेना की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ईरान का दावा-700 मिसाइल और 3600 ड्रोन दागे
इस बीच ईरान ने भी अपने रुख को और आक्रामक कर दिया है। ईरान की सेनाइस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से वह अमेरिका और इजरायल से जुड़े ठिकानों पर करीब 700 मिसाइलें और 3600 ड्रोन दाग चुका है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इससे साफ है कि ईरान सैन्य और मनोवैज्ञानिक दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ाना चाहता है। इसी कड़ी में लंबी दूरी तक मार करने वाली सेजिल-2 मिसाइल के इस्तेमाल की बात सामने आई है, जिसे कुछ लोग “डांसिंग मिसाइल” भी कह रहे हैं।
तेल बाजार में मची हलचल
युद्ध का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 105.66 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल 100.64 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। यह जुलाई 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है। इसकी बड़ी वजह Strait of Hormuz को लेकर बढ़ती चिंता है। यह समुद्री रास्ता दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। अगर यहां तनाव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ट्रंप की अपील और समुद्री सुरक्षा की चुनौती
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दूसरे देशों से अपील की है कि वे अमेरिका के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और खुला रखने में मदद करें। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने यह भी माना है कि नौसेना को पूरी तरह तैयार होकर तेल टैंकरों को सुरक्षा देने में अभी कुछ हफ्ते लग सकते हैं।
नेतन्याहू के वीडियो को लेकर भी चर्चा
इधर सोशल मीडिया पर एक और विवाद सामने आया है। दावा किया जा रहा था कि ईरानी हमले में इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की मौत हो गई और इजरायल एआई से बनाए गए उनके वीडियो जारी कर रहा है। इन दावों के बाद नेतन्याहू का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे कैमरे के सामने हाथ दिखाते नजर आ रहे हैं। इसे अफवाहों का जवाब माना जा रहा है।
सऊदी अरब में भी ड्रोन गिराए गए
युद्ध के फैलाव के संकेत खाड़ी देशों में भी दिखने लगे हैं। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसके बलों ने पूर्वी प्रांत में छह ड्रोन मार गिराए हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि यह टकराव अब सिर्फ ईरान, इजरायल और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर इसका असर पड़ रहा है।
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