Patna : बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राज्य की कानून-व्यवस्था और परीक्षा प्रबंधन पर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार और भाजपा की सरकार बिहार की बेटियों के लिए “काल” बन चुकी है।
बिहार की बेटियों का काल बनी नीतीश-भाजपा सरकार।
पटना जिले के मसौढ़ी थाना क्षेत्र की कोमल कुमारी दसवीं की छात्रा थी। माँ बाप की उम्मीद और सुनहरे भविष्य की आशा।
10वीं कक्षा की पहली परीक्षा थी। जाम और अव्यवस्था के चलते परीक्षा केंद्र पहुँचने में कुछ मिनटों की देरी हो गई और उसे…— Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) February 20, 2026
छात्रा की मौत ने मचाई सियासी हलचल
तेजस्वी यादव ने पटना जिले के मसौढ़ी थाना क्षेत्र में हुई दसवीं की छात्रा की मौत का जिक्र किया। उन्होंने इसे सरकार की अव्यवस्था और सिस्टम की विफलता बताया। पोस्ट में तेजस्वी ने लिखा कि कुछ मिनट की देरी के कारण परीक्षा केंद्र में प्रवेश न मिलने से छात्रा इतनी आहत हुई कि उसने ट्रेन के सामने खुद को समर्पित कर लिया। तेजस्वी का कहना है कि यह केवल एक छात्रा की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता है।
पूरा मामला क्या है?
मिली जानकारी के अनुसार, मसौढ़ी की रहने वाली छात्रा अपनी पहली बोर्ड परीक्षा देने जा रही थी। रास्ते में जाम और अव्यवस्था के कारण वह परीक्षा केंद्र कुछ मिनट देर से पहुंची। नियमों के अनुसार उसे प्रवेश नहीं दिया गया। परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्रा ने बहुत कोशिश की, लेकिन कोई उसे सुनने वाला नहीं था। परिणामस्वरूप, वह बेहद आहत हो गई और बाद में उसने आत्मघाती कदम उठाया। इस घटना ने इलाके में गहरा शोक और आक्रोश फैला दिया।
तेजस्वी यादव का आरोप : सिस्टम की विफलता
तेजस्वी यादव ने कहा, “यह केवल स्कूल का दरवाजा बंद होना नहीं था, बल्कि एक बेटी के सपनों का दरवाजा बंद कर दिया गया।” उन्होंने लिखा कि हर परीक्षा में जाम, कुप्रबंधन और बदइंतजामी आम बात हो गई है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार की बेटियां परीक्षा केंद्र के बाहर रो रही हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। अगर इस तरह की घटनाओं को नहीं रोका गया, तो हालात और भयावह हो सकते हैं।
मुआवजा और नियमों में बदलाव की मांग
तेजस्वी यादव ने सरकार से मांग की है कि कोमल कुमारी के परिवार को तुरंत मुआवजा दिया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों पर कुछ मिनट की देरी से पहुंचने वाले छात्रों को मानवीय आधार पर प्रवेश देना चाहिए। तेजस्वी ने लिखा, “एक-दो मिनट की देरी किसी बेटी की जान से ज्यादा कीमती नहीं हो सकती।” उन्होंने समाज से भी अपील की कि ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाई जाए, ताकि भविष्य में किसी और छात्रा को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
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