Gumla : जिले से करीब 19 किलोमीटर दूर स्थित आंजन धाम में रामनवमी को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। भगवान हनुमान की जन्मस्थली माने जाने वाले इस पवित्र स्थल पर सुबह से ही पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए हैं। पूरा इलाका भक्ति और आस्था में डूबा नजर आ रहा है।
सुबह से शुरू हुई विशेष पूजा-अर्चना
रामनवमी के मौके पर मंदिर परिसर की साफ-सफाई के बाद सुबह से ही विशेष पूजा शुरू हो गई। प्रमुख पुजारी बबलू मिश्रा के अनुसार, इस दिन यहां माता अंजनी और बाल हनुमान की विशेष पूजा होती है। इसके साथ ही सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ भी किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मेला और भंडारे का आयोजन
रामनवमी के अवसर पर आंजन धाम में हर साल भव्य मेला लगता है। यहां भंडारे का भी आयोजन होता है, जहां दूर-दूर से आए श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक कार्यक्रम चलते रहते हैं और भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ती रहती है।
आदिवासी समाज की खास भागीदारी
इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग भी शामिल होते हैं। दर्जनों गांवों से सैकड़ों श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा और हथियारों के साथ महावीर झंडा लेकर यहां पहुंचते हैं। यह नजारा आस्था और परंपरा का अनोखा संगम दिखाता है।
दीपोत्सव और हरि कीर्तन का आयोजन
चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां नौ दिनों तक कलश यात्रा और दुर्गा पूजा होती है। अष्टमी की रात मंदिर परिसर में हजारों दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया जाता है। वहीं नवमी के दिन सुबह से 24 घंटे का हरि कीर्तन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
पौराणिक मान्यता और ऐतिहासिक महत्व
आंजन धाम को लेकर मान्यता है कि यहां एक गुफा में भगवान हनुमान का जन्म हुआ था और माता अंजनी यहीं निवास करती थीं।
पहाड़ की चोटी पर स्थित यह प्राचीन मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां माता अंजनी बाल स्वरूप हनुमान को गोद में लिए विराजमान हैं।
देश-विदेश से पहुंचते हैं श्रद्धालु
इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से भी लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। रामनवमी और महावीर जयंती के मौके पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा आस्था का केंद्र
चारों ओर पहाड़ और जंगलों से घिरा आंजन धाम लोगों को शांति और सुकून का अनुभव कराता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां पहले 365 तालाब और कई शिवलिंग हुआ करते थे, जिनके अवशेष आज भी इलाके में देखने को मिलते हैं।
भक्ति में डूबा पूरा इलाका
रामनवमी के इस पावन मौके पर आंजन धाम पूरी तरह भक्ति में सराबोर है। यहां आस्था, परंपरा और प्रकृति का अद्भुत मेल देखने को मिलता है, जो इसे खास बनाता है।


