एलन मस्क ने अपनी कंपनी स्टारलिंग के लाइसेंस क्लियर न होने को लेकर एक पोस्ट किया और सीधा अम्बानी को टारगेट किया. तो राहुल गांधी तुरंत पहुंच गए उनकी चापलूसी करने! उक्त बातें, झारखंड विधानसभा के प्रतिपक्ष नेता बाबूलाल मरांडी ने कही.
बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जो कंपनी कल तक कांग्रेस को ‘खतरा’ लगती थी, आज राहुल गांधी उसके लिए रेड कार्पेट क्यों बिछा रहे हैं? क्योंकि कड़वा सच ये है कि राहुल गांधी को ‘पूंजीपतियों’ से नफरत नहीं है… उन्हें ‘भारतीय पूंजीपतियों’ से नफरत है. यहाँ के पूंजीपति भारत में लाखों नौकरियां देते हैं, भारत में टैक्स भरते हैं, इस देश का इंफ्रास्ट्रक्चर बनाते हैं, तो राहुल गांधी उन्हें ‘चोर’ कहते हैं. लेकिन जैसे ही कोई विदेशी अरबपति भारत सरकार पर सवाल उठाता है… राहुल गांधी तुरंत उसके सामने सरेंडर कर देते हैं। राहुल गांधी कहीं ये सब Deep State, Foreign Funding और Soros Gang के इशारे पर तो नहीं कर रहे?
क्या है पूरा मामला?
एलन मस्क ने 7 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आरोप लगाया कि भारत में कुछ प्रभावशाली उद्योगपति अपनी बाजार हिस्सेदारी बचाने के लिए उनकी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक की शुरुआत में बाधा डाल रहे हैं. उन्होंने लिखा, “Unfortunately, we are being blocked by certain oligarchs in order to maintain their monopolistic chokehold on the Indian people. You can guess who they are.” यानी कुछ बड़े कारोबारी भारतीय लोगों पर अपना एकाधिकार बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को रोक रहे हैं. हालांकि, इस पोस्ट में उन्होंने किसी उद्योगपति का नाम नहीं लिया.
इसके अगले दिन, 8 अक्टूबर को मस्क ने फिर सवाल उठाया कि उनकी कंपनी 165 से अधिक देशों में लाइसेंस प्राप्त कर चुकी है और पांच साल से भारत सरकार के नियमों का पालन कर रही है, फिर भी उसे भारत में सेवा शुरू करने की अनुमति क्यों नहीं मिली. उन्होंने लिखा, “Is Ambani the real boss of India?” यानी क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? इस टिप्पणी से उनका निशाना रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी की ओर स्पष्ट हो गया.
मस्क की इसी पोस्ट पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 8 अक्टूबर को जवाब दिया. उन्होंने लिखा, “Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy.” यानी भारत में आपका स्वागत है, एलन. अभी आप दूसरे व्यक्ति के बारे में जानेंगे. राहुल गांधी ने इस पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को गौतम अडानी की ओर इशारा माना गया, जिन पर राहुल और कांग्रेस लंबे समय से केंद्र सरकार से करीबी संबंधों और कथित कारोबारी लाभ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं.
राहुल गांधी के जवाब पर मस्क ने लिखा, “Thank you, Rahul. This is indeed troubling.” यानी धन्यवाद, राहुल. यह वाकई चिंताजनक है. इस बातचीत के बाद स्टारलिंक की मंजूरी का मामला कारोबारी प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ भारतीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया.
भारत सरकार ने 8 अक्टूबर को मस्क के भेदभाव के आरोपों को खारिज किया. दूरसंचार मंत्रालय के मुताबिक, स्टारलिंक, रिलायंस जियो की सैटेलाइट इकाई और भारती समूह से जुड़ी वनवेब को सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी करनी हैं. तीनों कंपनियां सुरक्षा मूल्यांकन की प्रक्रिया में हैं और नियामकीय ढांचे को भेदभावपूर्ण बताना गलत है.
दरअसल, राहुल गांधी लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाते रहे हैं. 29 अप्रैल 2024 को कर्नाटक के एक चुनावी कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अडानी और अंबानी के लिए काम करते हैं. उन्होंने चुनावी बॉन्ड और बड़े कारोबारी समूहों को लेकर भी सवाल उठाए थे. राहुल का आरोप रहा है कि केंद्र सरकार की नीतियों से कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को लाभ मिलता है.
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान राहुल गांधी ने अडानी-अंबानी का मुद्दा बार-बार उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि देश की संपत्ति और आर्थिक अवसर कुछ बड़े कारोबारी समूहों के हाथों में केंद्रित हो रहे हैं. 1 जुलाई 2024 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपने पहले भाषण में भी उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, अडानी और अंबानी के कथित संबंधों पर सवाल उठाए. उनके भाषण के कुछ हिस्से बाद में संसदीय रिकॉर्ड से हटाए गए थे.
30 सितंबर 2024 को हरियाणा के नारायणगढ़ में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि सरकार ने अडानी-अंबानी को जो पैसा दिया, वह गरीबों को दिया जाना चाहिए. यह बयान हरियाणा विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान आया था. कांग्रेस ने इसे आर्थिक असमानता और सरकार की कारोबारी नीतियों के खिलाफ अपने तर्क का हिस्सा बनाया.

