किसलय शानू
Ranchi : पंडरा इलाके में सुबह-सुबह जमीन कारोबारी भार्गव सिंह को अपराधियों ने गोली मारकर हत्या की दी। झारखंड में जमीन कारोबारी बनने से पूर्व बिहार में भार्गव सिंह (मृतक) ने अपना नाम अंकित सिंह रखा था। पटना में रहकर भार्गव सिंह उर्फ अंकित सिंह बिहार विधानसभा का कर्मचारी खुद को बताता था। विधानसभा में रहकर लोगों को अपने झांसे में फंसाया। धीरे-धीरे वह मंत्रियों के संपर्क में आने लगा। इस दौरान उसने कई सामान्य लोगों को अपने जाल में फंसाया। नौकरी और एडमिशन दिलाने के नाम पर भार्गव सिंह ने करोड़ों का चुना लगाया। इस दौरान कई बार बिहार पुलिस ने भी उसकी खोजबीन की, लेकिन दबदबा और ऊंची पहुंच के कारण बचते चला गया। पटना पुलिस की नजर में भार्गव सिंह चढ़ा था, लेकिन कोई ढूंढ़ नहीं सका।
वर्ष 2020-21 में पटना से भागकर आया रांची
सूत्रों का कहना है कि भार्गव सिंह उर्फ अंकित सिंह (मृतक) वर्ष 2020-21 में पटना से भागकर रांची आया था। इस दौरान उसने ठग की दुनिया से दूरी बनाकर रांची में जमीन का धंधा शुरु किया। जमीन की खरीद बिक्री करना शुरु किया। इस दौरान उसने रांची में भी कई लोगों को जमीन के मामले में चुना लगाया। कईयों का तो पैसा भी अबतक नहीं दिया। फिर उसने रांची में रहकर एक विधायक से संपर्क किया। विधायक को हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराने लगा। जिसके बाद भार्गव सिंह (मृतक) विधायक का करीबी बन गया। फिर विधानसभा चुनाव के दौरान भी भार्गव ने विधायक का साथ दिया और आज की तारीख में विधायक झारखंड विधानसभा में एक मंत्री का पदभार संभाले हुए है। मरने से पहले तक भार्गव सिंह उक्त मंत्री जी का पैसा हर जमीन पर लगाया करता था।
हुरहुरि की जमीन को लेकर हुआ था विजय से बकझक
सूत्रों की माने तो मृतक भार्गव सिंह का हुरहुरि में जमीन को लेकर विजय हेंड्रिक टेटे से बकझक हुआ था। दोनों उक्त जमीन को लेकर अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे। दो या तीन दिन पूर्व भार्गव और विजय में जमीन की बात को लेकर लड़ाई भी हुआ था। जिसमें विजय ने भार्गव सिंह को देख लेने की बात बोला था। हालांकि, एक और बात सामने आ रहा है कि भार्गव सिंह का अपने ही एक रिश्तेदार से काम धंधा को लेकर भी बहस हुआ था। अब, देखना यह है कि पुलिस जांच में क्या बात सामने आती है और हत्या के पीछे का क्या कारण है।
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