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    Home»झारखंड»झालमुड़ी पर मचा सियासी कोहराम; पीएम मोदी के ‘स्नैक ब्रेक’ के कारण रद्द हुई हेमंत-कल्पना सोरेन की रैली
    झारखंड

    झालमुड़ी पर मचा सियासी कोहराम; पीएम मोदी के ‘स्नैक ब्रेक’ के कारण रद्द हुई हेमंत-कल्पना सोरेन की रैली

    Team JoharBy Team JoharApril 20, 2026Updated:April 20, 2026No Comments3 Mins Read5
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    Jhargram: पश्चिम बंगाल की चुनावी फिजाओं में इन दिनों झालमुड़ी के एक छोटे से कोन ने ऐसा सियासी तूफान खड़ा कर दिया है जिसने सत्ता के गलियारों से लेकर सड़क तक हलचल मचा दी है। 19 अप्रैल 2026 जब झारग्राम के चुनावी रण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विशाल जनसभा को संबोधित किया, लेकिन सभा के ठीक बाद का एक अनप्लान्ड दृश्य अब एक बड़े राजनीतिक महायुद्ध का केंद्र बन चुका है। प्रधानमंत्री का काफिला जैसे ही सड़क किनारे एक झालमुड़ी की दुकान पर रुका, वहां मौजूद लोगों में उत्साह का संचार हो गया और मोदी के उस सादगी भरे अंदाज की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गईं, लेकिन इसी तस्वीर के पीछे एक गहरा और कड़वा राजनीतिक अध्याय सामने आया है जिसने बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है।

    तृणमूल कांग्रेस ने इस घटना को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाते हुए तीखा हमला बोला है और आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री के इस अचानक ‘स्नैक ब्रेक’ और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तामझाम ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी विधायक कल्पना सोरेन के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दीं। टीएमसी का दावा है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के नाम पर जिस तरह से प्रोटोकॉल का दायरा बढ़ाया गया, उसकी कीमत सोरेन दंपति को अपना कार्यक्रम रद्द करके चुकानी पड़ी, क्योंकि उनके हेलीकॉप्टर को झारग्राम में लैंडिंग की अनुमति नहीं मिल सकी। इसके चलते वे दांतन और केशियाड़ी में अपनी निर्धारित जनसभाओं को संबोधित नहीं कर सके और उन्हें वापस रांची लौटना पड़ा।

     

    टीएमसी ने इसे न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि एक सोची-समझी आदिवासी-विरोधी मानसिकता करार देते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री ने अपने फोटो-ऑप और स्नैक ब्रेक को दो प्रमुख संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों से ऊपर तरजीह दी है। चुनावी चश्मे से देखें तो झारग्राम का यह आदिवासी बहुल इलाका भाजपा और टीएमसी दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बना हुआ है, जहां सोरेन दंपति की सक्रियता को टीएमसी अपने आदिवासी वोट बैंक को भाजपा के खिलाफ लामबंद करने के लिए एक बड़े बूस्टर के रूप में देख रही थी।

    हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और सुरक्षा एजेंसियों का तर्क है कि उच्च सुरक्षा वाले व्यक्ति की उपस्थिति में क्षेत्र का रिस्ट्रिक्शन अनिवार्य होता है, लेकिन विपक्ष इसे सत्ता की हनक और चुनावी धांधली की कोशिश बताकर आक्रामक हो गया है। यह पूरा वाकया इस बात का प्रमाण है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में अब हर छोटी घटना एक बड़े राजनीतिक अस्त्र में तब्दील हो रही है, जहां झालमुड़ी का स्वाद फिलहाल राजनीति की कड़वाहट में खो गया है और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद आने वाले दिनों में बंगाल की सियासत को किस नए मोड़ पर ले जाकर खड़ा करता है।

    Also Read:  ममता के प्रचार में हेमंत-कल्पना मैदान में, दमदार भाषण और रैली कर आदिवासी बेल्ट में फूंकी जान

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