झारखंड सरकार ने दो सोना, एक लौह अयस्क और दो ग्रेफाइट खदानों का लीज आवंटन रद्द कर दिया है. इन खदानों की नीलामी 2016 से 2019 के बीच हुई थी, लेकिन फॉरेस्ट क्लीयरेंस और दूसरी जरूरी मंजूरियां नहीं मिलने से इनमें उत्पादन शुरू नहीं हो सका.
अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इन पांचों खदानों की दोबारा नीलामी कराने का निर्देश दिया है. खान विभाग ने लीज रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी है. इन खदानों की पहली नीलामी एमएसटीसी के प्लेटफॉर्म से हुई थी.
कंपनियों ने कहा- सरकारी मंजूरियों में हुई देरी
सरकार के फैसले पर संबंधित कंपनियों ने आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि खदानों में देरी उनकी वजह से नहीं हुई. फॉरेस्ट क्लीयरेंस, एनओसी और सरकारी प्रक्रियाओं में देरी के कारण उत्पादन शुरू नहीं हो सका. कंपनियों ने इस फैसले को माइनिंग ट्रिब्यूनल में चुनौती देने की बात कही है.
दो सोना खदानें भी शामिल
तमाड़ की परासी गोल्ड एंड एसोसिएटेड मिनरल्स खदान की नीलामी 1 नवंबर 2017 को हुई थी. 69.240 हेक्टेयर की इस खदान को रुंगटा माइंस लिमिटेड ने हासिल किया था. कंपनी को जनवरी 2021 तक उत्पादन शुरू करना था, लेकिन फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण ऐसा नहीं हो सका.
पश्चिमी सिंहभूम की पहाड़ीडीह गोल्ड ब्लॉक की नीलामी 26 अक्टूबर 2016 को हुई थी. 272.651 हेक्टेयर के इस ब्लॉक को मैथन इस्पात लिमिटेड ने हासिल किया था. यहां भी फॉरेस्ट क्लीयरेंस के कारण खनन शुरू नहीं हो सका.
पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी में स्थित भनगांव आयरन ओर ब्लॉक सारंडा वन प्रभाग में आता है. इसकी नीलामी 28 जून 2018 को हुई थी और साउथ-वेस्ट माइनिंग लिमिटेड ने इसे हासिल किया था. फॉरेस्ट क्लीयरेंस और अन्य एनओसी नहीं मिलने के कारण यहां भी उत्पादन शुरू नहीं हुआ.
सरकार ने पलामू की डुलसुलमा और लेसलीगंज ग्रेफाइट खदानों का लीज भी रद्द कर दिया है. दोनों खदानें टीम जियो रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड को मिली थीं. डुलसुलमा की नीलामी मार्च 2019 और लेसलीगंज की नीलामी अगस्त 2018 में हुई थी.
इन पांचों खदानों का लीज रद्द होने के बाद अब सरकार इन्हें फिर से नीलाम करेगी. मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इसकी प्रक्रिया शुरू होगी. दूसरी ओर, पुरानी कंपनियां फैसले को माइनिंग ट्रिब्यूनल में चुनौती देने की तैयारी में हैं.
Also Read : झारखंड : परिसीमन पर राज्यपाल से मिले आदिवासी प्रतिनिधि, विशेष सत्र बुलाने का सुझाव

