देश के कॉर्पोरेट सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन वरिष्ठ प्रबंधन और बोर्ड स्तर के शीर्ष पदों पर अब भी पुरुषों का वर्चस्व बना हुआ है. केंद्र सरकार ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि पिछले चार वित्तीय वर्षों के दौरान महिला अधिकारियों और निदेशकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, हालांकि नेतृत्व के अहम पदों पर उनकी हिस्सेदारी अभी भी पुरुषों की तुलना में काफी कम है.
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि यह जानकारी कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) के रिकॉर्ड पर आधारित है. आंकड़ों में 30 जून 2026 तक की स्थिति शामिल की गई है. यह जानकारी सांसद डॉ. थिरुमावलवन थोल्काप्पियन के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई.
वरिष्ठ प्रबंधन में महिलाओं की हिस्सेदारी 17.2 प्रतिशत
सरकार के अनुसार, CEO, CFO, कंपनी सचिव, मैनेजिंग डायरेक्टर, मैनेजर और होल-टाइम डायरेक्टर जैसे वरिष्ठ प्रबंधन पदों पर महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है.
वित्त वर्ष 2022-23 में इन पदों पर 34,879 महिलाएं थीं, जो 2023-24 में बढ़कर 38,273, 2024-25 में 39,071 और 2025-26 में 43,331 हो गईं. वहीं, इसी अवधि में पुरुष अधिकारियों की संख्या 1,86,946 से बढ़कर 2,08,772 तक पहुंच गई.
वित्त वर्ष 2025-26 में वरिष्ठ प्रबंधन के कुल 2,52,103 पदों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 17.2 प्रतिशत रही, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी करीब 82.8 प्रतिशत रही.
बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी बढ़ी महिला निदेशकों की संख्या
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कंपनियों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी महिलाओं की मौजूदगी लगातार बढ़ी है.
वित्त वर्ष 2022-23 में महिला निदेशकों की संख्या 7,62,712 थी, जो 2023-24 में 8,94,201, 2024-25 में 9,24,719 और 2025-26 में बढ़कर 10,36,694 हो गई. वहीं पुरुष निदेशकों की संख्या इसी अवधि में 19,75,487 से बढ़कर 25,09,619 हो गई.

वित्त वर्ष 2025-26 में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 29.2 प्रतिशत रही, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी लगभग 70.8 प्रतिशत रही.
लैंगिक अंतर कम होने के संकेत
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि कॉर्पोरेट क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और नेतृत्व के विभिन्न स्तरों पर उनकी उपस्थिति मजबूत हो रही है. हालांकि, वरिष्ठ प्रबंधन और निदेशक मंडल दोनों स्तरों पर पुरुषों की संख्या अब भी काफी अधिक है.
विशेषज्ञों का मानना है कि कॉर्पोरेट नेतृत्व में लैंगिक संतुलन सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं को निर्णय लेने वाले पदों तक पहुंचाने, नेतृत्व विकास कार्यक्रमों और समान अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में और प्रयास करने की आवश्यकता है.




